क्या ये अंत है ?
हम अगर ये सोच कर चलें की सब कुछ अपने हाथो में है और सब वैसे ही होगा जैसे हम चाहें तो ये नामुमकीन है , अपनी पूरी कोशिश झोकने क बाद भी अगर आप उस चीज़ को हासिल न कर पाएं ! तो आखरी में अप किस को उसका जिमेद्दार ठहरा सकते है.......... खुद को ?????
नहीं दरअसल आम जिन्दगी में हम हमारी सारी नाकामी को हम भगवन के भरोसे छोड़ कर आपने मन को समझा लेते है हाँ ये भगवन नहीं चाहता होगा । और आगे बड जातें हैं । क्या उस चीज़ को खोकर और सब इलज़ाम भगवन पर थोप कर हम अपने बचे हुए दिन या कहें जन्दगी निकाल पाएँगे ? क्या हम अपने दिल के कोने में छुपा हुआ दर्द जो भगवन भरोसे छोड़ आय है कभी बहार नहीं आयगा ?
वैसे इस समस्या का एक सरकतम उपाय ये हे की आप इतने कठोर बन जायें की कोई भी दर्द आपको छु न सके , पर किसी और की वजह से आप अपने आने वाले कल को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे ! पर कुछ लोग कर सकते है ऐसा जोकि कठोरे ह्रदय वाले होतें हैं !
to be continued...
वैसे इस समस्या का एक सरकतम उपाय ये हे की आप इतने कठोर बन जायें की कोई भी दर्द आपको छु न सके , पर किसी और की वजह से आप अपने आने वाले कल को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे ! पर कुछ लोग कर सकते है ऐसा जोकि कठोरे ह्रदय वाले होतें हैं !
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