संविदा नोकरी से हरताल तक !!! एक अनुभव



बहुत आशाओं के साथ पड़ लिख कर , क्वालीफाइंग एग्जाम पास कर के आज वो दिन था ,जब  हाथ में नोकरी का जोइनिंग लैटर था .खेर संविदा नोकरी थी पर आज जो इसे पाने की ख़ुशी थी तो आगे भविष्य का कुछ ख्याल नहीं आया ! फिर सोचा बाद में पड़ कर और कहीं अच्छी नोकरी मिल जायगी वैसे ये भी कोई बुरी नहीं थी ठीक ठाक सैलरी थी हर साल इन्क्रीमेंट का भी लिखा था और सरकारी है सरकार ऐसे ही थोड़ी रहने देगी अच्छा ही करेगी , हमने सुना भी था काफी क सरकारी नोकरी बड़े किस्मत वालों की मिलती है । बस फिर क्या था , नोकरी  ज्वाइन करने की देर थी ।अगले ही दिन जाकर नोकरी  पर जाने लगे ।
धीरे धीरे काम का लोड बढता रहा , दिन रात शिफ्ट लगती रही पड़ने की खूब कोशिश करी के और कोई अच्छी जगह पर चले जायंगे पर समय कहा चला जाता पता ही नहीं लग पता । देखते ही देखते साल निकलते चले गए कुछ दिनों बाद परमानेंट  नोकरी भी निकली पर  पड़ने का तो समय ही नहीं था और नाहीं  गत वर्षी का कोई एक्सपीरियंस काम आना था । क्यूंकि ऐसी कोई पालिसी ही नहीं थी सरकार के पास के जो पुराने लोग है एक्सपीरियंस वाले उहे कोई फायदा मिल सके ,एग्जाम भी दिया जितना हो सका उतना पड़ कर ,और अंत में वाही हुआ जो विचार मन में पहले ही अगये थे । कुछ नम्बरों से रहगये ।
चलो एक बात में मन में सोची चलो अभी ये नोकरी तो है ना हाथ में सरकार  और कुछ तो करेगी , ऐसी कोई पॉलिसीस जो की हमारे हित में हो आयगी ,फिर कुछ  बात बन जायगी ।और फिर लगे नोकरी करने में दिन रात ,समय फिर बितता गया । हर साल अप्रिसिअल फॉर्म भरते थे और सोचते थे सैलरी बढेगी पर कभी नहीं बड़ी ।नोकरी करते करते आज 3 साल  होगये । फिर मन में एक डर पैदा हुआ की अब क्या होगा  जिन्दगी भर ऐसे ही मजदूरी करना होगी जितना काम उतनी सैलरी और वो भी  फिक्स , इससे तो अच्छा कही प्राइवेट कंपनी में नोकरी करलेता काम लेते पर इन्क्र्मेंट , प्रोविडेंट फण्ड ,हेल्थ इन्सुरेंस जैसी सुविधाएँ तो मिलती तो लगे फिर दिमाग दौड़ाने और  अप्लाई करना चालू किया ।और स्थिति ये थी की वहा भी वो एक्सपीरियंस काम  ना आया । वहा से भी निराशा प्राप्त होने लगी ।  देखते ही देखते घर की जिमेदारियों का बोझ भी बड़ने लगा ।अब स्थिति कुछ ऐसी थी की 3 साल पहले जहाँ थे आज भी वहीँ पर है । और  काफी लोगो से चर्चा की तो पता लगा की कुछ लोग तो  10-15 सालो से ऐसे ही काम कर रहे हैं । ये सब सुन सुन कर और भी तकलीफ होने लगी की कहने को तो सरकरी हैं हम फिर भी स्थिथि किसी बंधवा मजदुर जैसी है ।
अब सोचा की चलो शाम शाम को  कुछ और काम करलेना चाहिए , शाम को कुछ काम करके जो पैसा आयगा उससे थोडा घर में सपोर्ट हो जायगा ।पर नियम के अनुसार आपको कोई कार्य करने की अनुमति नहीं है बंधवा मजदूरी में और  हेड क्वाटर पर भी रहना पड़ता है भले ही वो कोई दूर दराच वाला गाँव क्यों  ना हो जहाँ पर कोई और साधन नहीं हो काम करने का । फिर भी हिम्मत ना हारते हुए पास ही के जिले में एक छोटासा कंप्यूटर का काम ढूंडा और शाम को फ्री होकर वहा जाना शुर किया लोड बढता रहा सुबह उधर शाम को इधर समय कहा जाने लगा पता ही नहीं चलता था ,मन में गलत गलत विचार आने लगे कहीं उस समय नोकरी की ख़ुशी ण हुई होति और ज्वाइन ना किया होता तो  आज बहुत अच्छी जगह होते और अपने मित्रो को देख कर तो और घ्रणा होने लगती वो लोग तो अब बसने लगे थे अपने परिवार के साथ और यहाँ तो अभी तक कोई ठिकाना ही नहीं हैं । के आखिर आगे होगा क्या ।

ऐसी ही दिन चर्या रहती सुबह से शाम तक महनत करना पड़ता 2-3 जगह पर काम करना पड़ता जिस से की घर चल सके , पर हर कोई ये नहीं कर पता । फिर एक दिन पता लगा की सब लोग स्ट्राइक करने जारहे है । 
में अकेला नहीं सभी संविदा कर्मचारी त्रस्त  हैं ऐसी जीविका से । सबने एकता दीखते हुए भोपाल में धरना दिया और विचार बना लिया की इस बार आर या पार की लड़ाई की जायगी । इसी तरह का सोषण चलता रहा तो कैसे हम लोग जियेंगे , हमारा भविष्य बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है इस नोकरी में ।

वो जोइनिंग का दिन था और आज हरताल का पहला दिन उसी लगन और जोश के साथ हम धरना स्थल पर अगये , फिर सोचा इतनी पढाई लिखाई कर के भी अपना हक़ , यहाँ तक की वेतन वृधि के लिए भी हमे ऐसे टेंट लगा कर  वेतन कटवा कर लड़ना होगा । जब इतने बाद बड़े घोटाले होते हैं तब कोई फिकर नहीं करता , इतना पैसे पानी की तरह कहा कहा खर्च करदिया जाता हैं सरकार द्वारा जब कोई ध्यान नहीं देता पर यहाँ कुछ संविदा कर्मचारी की थोड़ी सा वेतन ना बढाने  के 100 कारण तयार रहते हैं अफसरों के पास । 
हरताल की योजना   भी शांतिपूर्ण तरीके से  की गयी थी , और उसके फल स्वरुप आज 10 दिन  हो चुके हैं कोई हमको सुन ने को भी तयार नहीं और कारण ऐसे बाते जाते हैं की आप के  कॉन्ट्रैक्ट में  लिखा हैं की आप हरताल पे नहीं जा सकते , पर किसी को ये नहीं दीखता की कॉन्ट्रैक्ट में ये भी तो लिखा है की हर वर्ष आपकी वेतान वृधि की जायगी । यहाँ शांति पूर्ण तरीके से किस को क्या मिला है आखरी समय तब था जब गाँधी जी  ने शांतिपूर्ण तरीके से इस देश को आजादी दिलाई थी पर अज कल हिंसा के ही उधारण दीखते हैं ( पटेल / जाट आरक्षण ) जहाँ पर 1-2 दिन के अंदर सरकार को झुक कर उनकी बातें स्वीकारना पड़ी , जितनो का नुकसान  वहा पर लोगों ने किया उस  धन से  पुरे देश के संविदा कर्मचारी परमानेन्ट करदिये जा सकते थे पर इतना प्रबंध कोण करेगा इस देश में सबको अपनी पड़ी है आम आदमी की कोई नि सुनता नहीं कुछ करने देता हैं । बस एक आम आदमी की आवाज़ दबादी जाती है । और हम अभी भी गाँधी जी के पद चिन्हों पर चलते हुए  अहिंसा से हमारी मांगो को मंगवाने के लिए लड़ते रहेंगे । और इस बार की लड़ाई एक तरफ़ होगी और जित हमारी ही होगी , क्यूंकि  हम आखरी तक डंटे रहेंगे ।
इस बार तो हमको हमारा हक पाना ही है हमारे लिए और आने वाले संविदा करमचारीओं के लिए !


इस देश में जीने के लिए सहनशीलता  चाहिए ! जो जितना सहन करेगा वो उतना बदलाव लाने की कोशिश करेगा । 

संविदा नोकरी से हरताल तक  !!! एक अनुभव  #continued 26.06.2016

आखिर जित राजनीती की हुई । हम लोग छोटे से कर्मचारी हैं , नहीं की राजनीतिज्ञ , और हार का पलड़ा भी उनकी और ही झुका होता है जिनको राजनीती नहीं अति । देश  के हक़ की लड़ाई करते करते कई लोगो  शहीद होगय पर कभी किसी ने  हार नहीं मानी  और हम भी लड़ते रहंगे  सरकारे आयंगी सरकारे जायंगी ।  इतनी महनत  कर के जो संघठन खड़ा हुआ था वो आज तितर बितर होगया है , और अब तो धीरे धीरे तानशाही का आलम आ गया  है जब मन में अत है लोगो को निकल दिया जाता है । जिन लोगो को पहले जब योग्य मानकर बरसो कार्य करवया और पल भर में  अप्रिसिअल के नाम अयोग्य घोषित कर के निकलना शुरू करदिया है । मानवाधिकार नाम की कोई चीज़ ही नहीं हैं जो लोग परमानेंट होकर काम से जी चुराते है , घुस खोरी करतें हैं सरकार उनको  बिना किसी अप्प्रिसिअल के मोटे मोटे वेतन देने को तयार हैं पर जो व्यक्ति दिन रात  महानत  कर के  विभाग के कार्य को  गति प्रदान कर रहा हैं । वो अपने हक़ के लिए लड़ भी नहीं पा रहे है जहा पहले परमानेंट होने से लेकर कही मांगो क साथ जो संघठन खड़ा था । आज वाही बिखरा हुआ संघठन ऊन लोगो की नोकरी  बचाने में लगा हुआ है , जो कुछ दिनों पहले जैसे तैसे म्हणत करके अपना पेट पलते  थे । अब तो कई लोगो के पास तो कुछ काम भी नहीं रहा करने को जो भी बचा कुचा पैसा है वो भी कोर्ट की तारीखों में निकलने लगा हैं  ।
और जो बचे हुए हैं मेरी तरह वो  ये सोचने में लगे हैं की कुछ नया जुगाड़ करले जल्द से जल्द वर्ना जो आज कुछ लोगो के साथ हुआ है कई और के साथ भी हो सकता है ।  वैसे विभाग या सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता एक को निकल कर अगर आवेदन निकल भी दें तो हजारों फॉर्म अजयंगे । करोड़ो की  कमाई होजयगी , और बेरोजगारी का अकड़ा भी  केंद्र को कम दिखाया जायगा , जिनको पहले मिली थी उनको और जिनको अभी देंगे उनको सबका मिलाकर  दिखाया जायगा ।
 अब सिर्फ एक ही रास्ता है जो हम लोगो के पास  बचा है इतने साल यहाँ पर बर्बाद करने के बाद , की या तो कोई नयी नोकरी ढूंड कर वहा  चले जय सब समय महनत  जो की आज तक को पराया कर के , या फिर से एक मजबूत संघठन  को खड़ा कर के , उनलोगों को दिखाया जाय के हम हार मान ने वालो में से नहीं हैं ।  में दुसरे बिंदु पर ही विशवास करता हु और सब से आग्रह भी करता हु की जब धीरे धीरे कर के जाना सभी को ही (नोकरी छोड़ना )  है , तो क्यों ना एक बार और जंग लड़ी जाय  और इस बार पूरी ताकत से एक मजबूत संघठन को खड़ा करके लड़ा जाये ।

नोकरी मायने नी रखती  , आत्मसम्मान मायने रखता है दो वक्त की रोटी तो एक भिक मांग कर खाने वाला भी कम लेता हैं और हम लोग तो योग्य लोग हैं जो कम से कम अपने हक़ के लिए तो लड़  ही सकते हैं ।

इस कविता से हमे प्रेरणा लेनी चाहिए

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

--हरिवंशराय बच्चन  जी








क्या ये अंत है ?

क्या ये अंत है ?


 हम अगर ये सोच कर  चलें की सब  कुछ अपने हाथो में है और सब वैसे ही होगा जैसे हम चाहें तो ये नामुमकीन है , अपनी पूरी कोशिश झोकने क बाद भी अगर आप उस चीज़ को हासिल न कर पाएं ! तो आखरी में अप किस  को उसका जिमेद्दार ठहरा सकते है.......... खुद को ?????  

नहीं  दरअसल आम जिन्दगी में हम हमारी सारी नाकामी को हम भगवन के भरोसे छोड़ कर आपने मन को समझा लेते है हाँ ये भगवन नहीं चाहता होगा । और आगे बड जातें हैं । क्या उस चीज़ को खोकर और सब इलज़ाम भगवन पर थोप कर हम अपने बचे हुए दिन या कहें जन्दगी निकाल पाएँगे ? क्या हम अपने दिल के  कोने में  छुपा हुआ दर्द जो भगवन भरोसे छोड़ आय है कभी बहार नहीं आयगा ?
वैसे इस समस्या का एक सरकतम उपाय ये हे की आप इतने कठोर बन जायें की कोई भी दर्द आपको छु न सके , पर किसी और की वजह से आप अपने आने वाले कल को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे ! पर कुछ लोग  कर सकते है ऐसा जोकि कठोरे ह्रदय वाले होतें हैं !


to be continued...


प्यार सबके लिए नहीं होता !!!


ये लेख पूरा काल्पनिक है इसका कसी भी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है !

प्यार सबके लिए नहीं होता कुछ लोगो क लिए ये सिर्फ एक समय पारित करने का तरीका है !



निर्द्यिता ही ख़ुशी देती है !
वैसे तो कहने में ये गलत लगता है पर असलियत यही है अगर आप खुशलता से किसी से बात करते हो , प्यार करते हो , कभी किसी का बुरा नहीं करते हमेशा ख़ुशी देते हो लेकिन बदले में ऐसे लोगो को क्या मिलता है "हजारो गम" ! हाँ ये सत्य है अगर आप इस श्रेणी में आते हो तो आप बहुत बड़े मुर्ख हो लगो आपका भरपूर फायदा उठाते है और फिर इतना बुरा आपके साथ करते हैं जो अप सपने भी नहीं सोच सकते , पर यहाँ पर जो लोग निर्दयी होतें है वो लोग हमेशा ही खुश रहतें हैं क्यूंकि वो खुद दूसरा का बुरा कर चुके है तो उन्हें पता होता है की इस से कोई फर्क नहीं पड़ता जिन्दगी चलती रहती है !समय बड़ा ही बलवान होता है बड़ी बड़ी मुश्किलें तक भूल जाता है इन्सान  !
उसने जिन्दगी में सिर्फ एक ही गलती करी की किसी का बुरा नहीं सोचा नहीं बुरा किया , अब जाकर उसे लगा की कितने गमो का पहाड़ घिरा उसपर  !हर चीज़ किसी ने करी है तो सिर्फ छल कपट ही किया है सिर्फ मतलब से किया है ,कुछ सपने दिखाए तो भी मतलब के सिर्फ !पर इन चीजों के लिए किसी को भी गुनेगार नहीं ठहरा सकता क्यूंकि ये उसकी  ही गलती है जो उसने किसी को इतनी तवज्जो दी किसी के  बोले हुए शब्दों को अपना माना उन पर अमल किये ! पर उसे क्या पता था ये सिर्फ एक ढोंग है और सिर्फ जब तक आप उसके जीवन में कुछ मूल्य रखते हो तभी तक वो आपके साथ था जैसे ही अप का कोई मूल्य - काम नहीं रहा आपकी वैल्यू भी वाही ख़तम होगई !वैसे हर कोई येही करता है पर असली गम जब होता है तब कोई दिल से  जुड़ा व्यक्ति ये कर दे ! जिन्दगी में हर सेकंड आपको कुछ सिखाता है , और एक छाप छोड़ जाता है आपके जीवन में और जो दिल से जुड़ा होता है वो इतिहास बनकर रोज पूरी जिन्दगी आपको रुलाता रहता है !काश ये निर्दैयता उस वक्त आजाती जब ये प्यार के झोंके आने लगे थे !
ये प्यरा नहीं व्यापर है ! जहा धन , खूबसूरती ,भविष्य की गुंजाईश ज्यादा मायने रखने लगी हैं ! सुना था प्यरा दिलो के मिलने पर होता है, पर स्थीती  के मिलने को प्यरा नहीं धोका कहेंगे ! कुछ तो कमी रही होगी जो इतना बड़ा फैसला इतनी आसानी से सुना दिया ! दुनिया में हर चीज़ आसान होति है अगर उसे करने की दिल से इच्छा हो और अगर आपका इरादा ही नेक नहीं हो तो फिर लाख कोशिश ही क्यों ना कार्लो अप उसको नहीं पा सकते !
प्यार सबके लिए नहीं हो ता  , अगर आप इसके लायक नहीं हो तो ये भी आपके लायक नहीं है ! इन्सान लायक अपने कर्मो से अपनी भावनाओ से होता है , मतलब से कोई लायक नहीं बनता  !और अगर आप इसके लायक नहीं हो तो अप कभी इसको पा नहीं सकते और पैसे से ख़ुशी खरीदी जाती है प्यरा नहीं ! प्यार सब क लिए नहीं होता भगवन चुनता है लोगो को जो इसके लायक होतें है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सफलता !!!!!!!!! एक चुनोती

सफल  , कहने को तो ये तीन अक्षरों का शब्द है पर ये कहलाना बड़ा ही मुश्किल है . जब हम स्कूल में पड़ते थे उस समय  सोचना अपने आप को बड़ी ही आसानी से डॉक्टर , इंजिनियर ,बिजनेसमैन बंदना बहुत ही आसान हुआ करता था .पर जैसे जैसे हम आगे बड़ते गये दिल दिमाग  का जो ताल मेल है वो बहुत गद्बद्ता गया.  कुछ पल ऐसे थे जब लगा की बहुत कुछ पलिया है और बस अब येही वो हैं  जिसके सहारे जीवन आसानी से निकल जायगा पर वक्त हर वक्त प्रबल नहीं होता .हमारे सितारे ना जाने क्यों डगमगा जाते हैं.  ऐसा किसी एक क साथ नहीं हम सभी क साथ कभी ना कभी  होता ही है .
जैसे जैसे हम इस उलझी हुई दुनिया में उकझ ते जातें है वो बचपना याद आजाता है जहा हम हर चीज़ की ख्वाइश कर सकते थे वहीँ अब हम हर चीज़ दुसरो क मुताबित करतें है उसपर विचार कर कर के इतने निष्कर्ष निकल लेते है और करना तो दूर हम उस बारे में सोचते भी नहीं .
सिर्फ एक धनात्मक  सोच (पॉजिटिव थिंकिंग ) के साथ हम  ये जहान नहीं जित सकते ये , ये सत्य है आपका लोगो क प्रति नजरिया , आपके पास  का माहोल उस पर काफी फर्क डालता है ,लोग आपको हर चीज़ हर सोच बदलने की कोशिश करतें है . आपके हर तर्क को गलत साबित करने में लगे रहते हैं  पता नहीं क्यों कुछ लोगो को इस चीज़ में बड़ी ख़ुशी महसूस होति है .जब आदमी आपके किसी दुःख में आपके साथ नहीं होसकता और  नहीं वो आपके जीवन क लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दे सकता तो उसे हमारे किसी भी प्रगति और सोच को बदलने का कोई हक़ नहीं , और नहीं हमे उस चीज़ को दिल पर लेकर सोचने की कोई कोशिश करनी चाहिए .


जैसे हमारे हाथ की उँगलियाँ  मुक्त होति है कही भी घूम सकती है कुछ भी पा सकती है , पर उसपर ये समाज ये लोग बंदिशों की डोरियाँ लपेटते चलें जाते हैं .कोई चाहता है अप ये ना करें कोई छठा है अप वो ना करें और फिर इस मतभेद में दिल और दिमाग को जो ताल मेल है वो लड़ खड़ा जाता अहि और हम जहा अटके होतें है वाही अटके रह जातें  है . 
जो लोग हमारे लिए प्रेरणा बनते है हमको एक धनात्मक सोच क लिए प्रेरित करतें है ,जिनको पा कर हम भी खुश होतें और खूब सपने सजाते हैं , और एक संतोष रहता है जीवन में , उनसे भी हमरी सोच पे बहुत फर्क पड़ता है वो कसी भी रूप में हो सकते है  आपका प्यार , आपका परिवार . और उस चीज़ का आपके साथ  उतना ही जरुरी है जितना प्रकश का एक पोधे क लिए वो तभी बढेगा जब उसका मन , उसका दिल प्रसन्न रहेगा वो अपने  आप ही हर दिन के जीवन में  आनंद लेने लगेगा .  
अपने अस पास का माहोल अपने हिसाब से बनाना बहुत ही महवपूर्ण है सफल होने के लिए ,जैसे तलब में आप रहोगे वैसा ही पानी आपको मिलगा अच्छा हुआ तो अच्छा , मीठा हुआ तो मीठा , गन्दा हुआ तो गन्दा और उस तलब में कही तक भी चले जाएँ वो वैसा ही रहेगा .
जीवन एक बार बनता है और एक ही मोका मिलता है सब को अपनी लाइफ में या तो उसके लिए मर मिटो  उसे पाने में जी जान लागलो या फिर चुप चाप बेठ कर जैसा समाज , लोग ,परिवार चाहे वो   सहन करते रहो. कुए का मेंडक बनना बहुत आसान है कुंकी वो वाही पैदा होता है और वाही मर जाता है पर समुद्र की जलपरी बनना बहुत मुश्किल . इन मुश्किलों को हटाने का सिर्फ एक ही रास्ता है बस अपने लक्ष्य क पीछे चलो और जो पाने की तमन्ना हो उसे पाने क लिए जी जान लगादो ,लोगो का तो काम है कहना क्कुह अच्छा होगा तो लोगो को नहीं आपको संतोष और आनंद मिलेगा  और कुछ जायगा तो कोई जिन्दगी ख़तम नहीं होजयगी , जितना आपकी काबिलियत है उतना तो आप कभी भी बना सकते हो उससे ज्यदा तो आपके लिए एक धनात्मक उपलब्धि है जीवन की !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!               













  

क्या पैसा ही सब कुछ होता है !!!!!!!!!!

क्या पैसा ही सब कुच्छ होता है ,अगर ये सवाल आप किसी भी आम आदमी से पूछोगे तो उसका जवाब हमेशा ही रहेगा हाँ पैसा ही सब कुछ होता है !पैसे से आप दुनिया की हर ख़ुशी , हर चीज़ हर वो मुकाम ला सकते हो जिस से की आप को ख़ुशी मिले आप जीवन में आनंद पा सकें ! जब कोई लड़की किसी से प्यार करती है , या फिर कोई लड़की की किसी लड़के से शादी होने वाली होति है तो क्या वो सोचती है की उसका पति उसे वो सब ख़ुशी दे पायगा क्या वो हर चीज़ जो हम telivision/ या हमारे आस पास आमिर लोगो को करता देखते है क्या वो सब में कर पाऊँगी , क्या मेरा बच्चा जिसकी अभी हाथ की लकीरे भी नहीं बनी है वो सरे सुख और ख़ुशी पा सकेगा जो हम दुसरे लोगो को देखकर अपने मन में सोचते है !


में ये नहीं कहता की पैसा ही सब कुछ नहीं होता ! पर पैसे की जीवन में एक ऐसी जगह बनी हुई है की उसके बिना हम अपनों के और पास आ सकते हैं ! हर व्यक्ति चाहता है और इस बात की पूरी कोशिश करता है की वो अपने परिवार की हर इच्छा को पूरी कर सके , वो हर चीज़ दे सके जिसके लिये उसका बच्चा रोता हो , हर वो चीज़ जिसके लिए उसकी पत्नी इच्छा करती हो ! हर वो चीज़ जिन के लिए उसके माँ बाप ने उसकी ख़ुशी में नयोछाव्वर कर दी हो !पर हर व्यक्ति इस में सक्षम नहीं होता पर वो अपनी पूरी जान लगा देता है उनसभी को पाने में !
जिया पैसो से हम अपने एक पल की ख़ुशी पातें है उसमे पता नहीं कितने गरीबों का एक वक्त का खाना मिल जाये , पर हमको किसकी परवाह है हम अपने जीवन को संतुष्ट करने में लगें है हम मिलो घूम आते है ख़ुशी के लिए , लाखो रुपये उड़ा देतें है फिर भी हमे वो ख़ुशी नहीं मिलती जो एक गरीब को खाने खिलने पर किसी सज्जन को मिलती है , और ऐसा नहीं होता की उस व्यक्ति क पास पैसा बहुत है की वो इधर उधर लोगो की सेवा में उड़ा  रहा है पर ऐसा नहीं है , उस सज्जन ने अपने जीवन में ये दिन जरुर देखें होंगे जब वो गरीब और असहाय होगा की भूख का दर्द क्या होता है !


जो आदमी जमीं से उठता है उसे उसकी कद्र हमेशा याद रहती है की कितना दर्द होता है जमीं में !

में बस इतना चाहता हूँ की  में इतना पैसे कमा सकूँ की अपनों की वो हर इच्छा पूरी कर सकू और कभी मोका लगे तो किसी गरीब की एक वक्त की खाने की भूक मिटा सकूँ ! 

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संविदा नोकरी से हरताल तक !!! एक अनुभव

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