जीवन जीना सिखा देता है
सच ही कहा है की जीवन जीना सिखा देता है ,मेने इतना जीवन देखा नहीं है फिर भी जितना सा भी उसमे ये बात मुझे सच ही लगी .अपने जीवन में इतना व्यस्त हो ता जारहा हूँ की मुझे मेरे सपने के लिए समय कम लगने लगा है , रोज्मार्र्हा की जिंदगी इतनी सरल लगती है और आसानी से कट जाती है पर रत को नजाने क्यों एक सवाल मन में अत है क्या आज मेने अपने लिए कुछ किया , कुछ सोचा दिन भर दुसरो क सपनो के लिए जीते हुए ख़तम होगये .
और ये दिल हमेशा बेचैन होता रहता है और रात भर सोने नहीं देता की जिन्दगी फिर नहीं मिलेगी बीटा कुछ तो करना है कुछ तो पाना है और इसी सोच में रात कत्जती है और अगला दिन फिर वाही भाग दौड़ में निकल जाता है इस बीमारी का इलाज तो मुझे भी नज़र नहीं आरहा की कैसे में क्या करू जो सब कुछ छोड़ कर बस वाही करने लागु जो मेरा दिल कहता है , वाही करू जिसके सपने में हमेशा देखता हूँ .क्या इतना आसान है .
नहीं समझ सकता , नहीं कर सकता क्युकी ये डर फिर से दिल में बस जाता है की कभी जो मेने सोचा वो मुझे कहा लेजयेगा ,लोग क्या कहेंगे का अच्छा भला जी रहता पता नहीं कैसे कैसे सवाल मन में आने लगते है की जिनके जवाब मेरे खुद क पास भी नहीं होते .
अकेला महसूस होता है , अकेला खड़ा हूँ अकेला लड़ना है , सभी को आशाएं है पर किसी को मन की भावनाओ से कोई वास्ता नहीं .कुछ करने का जुनून भी सोगया है उसे भी मुझ पर विश्वास नहीं रहा की जब में अपने आप के लिए हिम्मत नहीं करसकता तो वो भी मेरे अंदर रहकर क्या करेगा .कठिन राहों पर कोई साथ नहीं देता और देगा भी क्यों उसके खुद क सपने भी तो उसे ये कदम उठाने नहीं देते .और फिर येही सोच कर अपने आप को मानना पड़ता है कल से जरुर , कल से जरुर ..........................
पर वो कल कब आयेगा ??????????????????
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