क्या ये अंत है ?

क्या ये अंत है ?


 हम अगर ये सोच कर  चलें की सब  कुछ अपने हाथो में है और सब वैसे ही होगा जैसे हम चाहें तो ये नामुमकीन है , अपनी पूरी कोशिश झोकने क बाद भी अगर आप उस चीज़ को हासिल न कर पाएं ! तो आखरी में अप किस  को उसका जिमेद्दार ठहरा सकते है.......... खुद को ?????  

नहीं  दरअसल आम जिन्दगी में हम हमारी सारी नाकामी को हम भगवन के भरोसे छोड़ कर आपने मन को समझा लेते है हाँ ये भगवन नहीं चाहता होगा । और आगे बड जातें हैं । क्या उस चीज़ को खोकर और सब इलज़ाम भगवन पर थोप कर हम अपने बचे हुए दिन या कहें जन्दगी निकाल पाएँगे ? क्या हम अपने दिल के  कोने में  छुपा हुआ दर्द जो भगवन भरोसे छोड़ आय है कभी बहार नहीं आयगा ?
वैसे इस समस्या का एक सरकतम उपाय ये हे की आप इतने कठोर बन जायें की कोई भी दर्द आपको छु न सके , पर किसी और की वजह से आप अपने आने वाले कल को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे ! पर कुछ लोग  कर सकते है ऐसा जोकि कठोरे ह्रदय वाले होतें हैं !


to be continued...


प्यार सबके लिए नहीं होता !!!


ये लेख पूरा काल्पनिक है इसका कसी भी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है !

प्यार सबके लिए नहीं होता कुछ लोगो क लिए ये सिर्फ एक समय पारित करने का तरीका है !



निर्द्यिता ही ख़ुशी देती है !
वैसे तो कहने में ये गलत लगता है पर असलियत यही है अगर आप खुशलता से किसी से बात करते हो , प्यार करते हो , कभी किसी का बुरा नहीं करते हमेशा ख़ुशी देते हो लेकिन बदले में ऐसे लोगो को क्या मिलता है "हजारो गम" ! हाँ ये सत्य है अगर आप इस श्रेणी में आते हो तो आप बहुत बड़े मुर्ख हो लगो आपका भरपूर फायदा उठाते है और फिर इतना बुरा आपके साथ करते हैं जो अप सपने भी नहीं सोच सकते , पर यहाँ पर जो लोग निर्दयी होतें है वो लोग हमेशा ही खुश रहतें हैं क्यूंकि वो खुद दूसरा का बुरा कर चुके है तो उन्हें पता होता है की इस से कोई फर्क नहीं पड़ता जिन्दगी चलती रहती है !समय बड़ा ही बलवान होता है बड़ी बड़ी मुश्किलें तक भूल जाता है इन्सान  !
उसने जिन्दगी में सिर्फ एक ही गलती करी की किसी का बुरा नहीं सोचा नहीं बुरा किया , अब जाकर उसे लगा की कितने गमो का पहाड़ घिरा उसपर  !हर चीज़ किसी ने करी है तो सिर्फ छल कपट ही किया है सिर्फ मतलब से किया है ,कुछ सपने दिखाए तो भी मतलब के सिर्फ !पर इन चीजों के लिए किसी को भी गुनेगार नहीं ठहरा सकता क्यूंकि ये उसकी  ही गलती है जो उसने किसी को इतनी तवज्जो दी किसी के  बोले हुए शब्दों को अपना माना उन पर अमल किये ! पर उसे क्या पता था ये सिर्फ एक ढोंग है और सिर्फ जब तक आप उसके जीवन में कुछ मूल्य रखते हो तभी तक वो आपके साथ था जैसे ही अप का कोई मूल्य - काम नहीं रहा आपकी वैल्यू भी वाही ख़तम होगई !वैसे हर कोई येही करता है पर असली गम जब होता है तब कोई दिल से  जुड़ा व्यक्ति ये कर दे ! जिन्दगी में हर सेकंड आपको कुछ सिखाता है , और एक छाप छोड़ जाता है आपके जीवन में और जो दिल से जुड़ा होता है वो इतिहास बनकर रोज पूरी जिन्दगी आपको रुलाता रहता है !काश ये निर्दैयता उस वक्त आजाती जब ये प्यार के झोंके आने लगे थे !
ये प्यरा नहीं व्यापर है ! जहा धन , खूबसूरती ,भविष्य की गुंजाईश ज्यादा मायने रखने लगी हैं ! सुना था प्यरा दिलो के मिलने पर होता है, पर स्थीती  के मिलने को प्यरा नहीं धोका कहेंगे ! कुछ तो कमी रही होगी जो इतना बड़ा फैसला इतनी आसानी से सुना दिया ! दुनिया में हर चीज़ आसान होति है अगर उसे करने की दिल से इच्छा हो और अगर आपका इरादा ही नेक नहीं हो तो फिर लाख कोशिश ही क्यों ना कार्लो अप उसको नहीं पा सकते !
प्यार सबके लिए नहीं हो ता  , अगर आप इसके लायक नहीं हो तो ये भी आपके लायक नहीं है ! इन्सान लायक अपने कर्मो से अपनी भावनाओ से होता है , मतलब से कोई लायक नहीं बनता  !और अगर आप इसके लायक नहीं हो तो अप कभी इसको पा नहीं सकते और पैसे से ख़ुशी खरीदी जाती है प्यरा नहीं ! प्यार सब क लिए नहीं होता भगवन चुनता है लोगो को जो इसके लायक होतें है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सफलता !!!!!!!!! एक चुनोती

सफल  , कहने को तो ये तीन अक्षरों का शब्द है पर ये कहलाना बड़ा ही मुश्किल है . जब हम स्कूल में पड़ते थे उस समय  सोचना अपने आप को बड़ी ही आसानी से डॉक्टर , इंजिनियर ,बिजनेसमैन बंदना बहुत ही आसान हुआ करता था .पर जैसे जैसे हम आगे बड़ते गये दिल दिमाग  का जो ताल मेल है वो बहुत गद्बद्ता गया.  कुछ पल ऐसे थे जब लगा की बहुत कुछ पलिया है और बस अब येही वो हैं  जिसके सहारे जीवन आसानी से निकल जायगा पर वक्त हर वक्त प्रबल नहीं होता .हमारे सितारे ना जाने क्यों डगमगा जाते हैं.  ऐसा किसी एक क साथ नहीं हम सभी क साथ कभी ना कभी  होता ही है .
जैसे जैसे हम इस उलझी हुई दुनिया में उकझ ते जातें है वो बचपना याद आजाता है जहा हम हर चीज़ की ख्वाइश कर सकते थे वहीँ अब हम हर चीज़ दुसरो क मुताबित करतें है उसपर विचार कर कर के इतने निष्कर्ष निकल लेते है और करना तो दूर हम उस बारे में सोचते भी नहीं .
सिर्फ एक धनात्मक  सोच (पॉजिटिव थिंकिंग ) के साथ हम  ये जहान नहीं जित सकते ये , ये सत्य है आपका लोगो क प्रति नजरिया , आपके पास  का माहोल उस पर काफी फर्क डालता है ,लोग आपको हर चीज़ हर सोच बदलने की कोशिश करतें है . आपके हर तर्क को गलत साबित करने में लगे रहते हैं  पता नहीं क्यों कुछ लोगो को इस चीज़ में बड़ी ख़ुशी महसूस होति है .जब आदमी आपके किसी दुःख में आपके साथ नहीं होसकता और  नहीं वो आपके जीवन क लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दे सकता तो उसे हमारे किसी भी प्रगति और सोच को बदलने का कोई हक़ नहीं , और नहीं हमे उस चीज़ को दिल पर लेकर सोचने की कोई कोशिश करनी चाहिए .


जैसे हमारे हाथ की उँगलियाँ  मुक्त होति है कही भी घूम सकती है कुछ भी पा सकती है , पर उसपर ये समाज ये लोग बंदिशों की डोरियाँ लपेटते चलें जाते हैं .कोई चाहता है अप ये ना करें कोई छठा है अप वो ना करें और फिर इस मतभेद में दिल और दिमाग को जो ताल मेल है वो लड़ खड़ा जाता अहि और हम जहा अटके होतें है वाही अटके रह जातें  है . 
जो लोग हमारे लिए प्रेरणा बनते है हमको एक धनात्मक सोच क लिए प्रेरित करतें है ,जिनको पा कर हम भी खुश होतें और खूब सपने सजाते हैं , और एक संतोष रहता है जीवन में , उनसे भी हमरी सोच पे बहुत फर्क पड़ता है वो कसी भी रूप में हो सकते है  आपका प्यार , आपका परिवार . और उस चीज़ का आपके साथ  उतना ही जरुरी है जितना प्रकश का एक पोधे क लिए वो तभी बढेगा जब उसका मन , उसका दिल प्रसन्न रहेगा वो अपने  आप ही हर दिन के जीवन में  आनंद लेने लगेगा .  
अपने अस पास का माहोल अपने हिसाब से बनाना बहुत ही महवपूर्ण है सफल होने के लिए ,जैसे तलब में आप रहोगे वैसा ही पानी आपको मिलगा अच्छा हुआ तो अच्छा , मीठा हुआ तो मीठा , गन्दा हुआ तो गन्दा और उस तलब में कही तक भी चले जाएँ वो वैसा ही रहेगा .
जीवन एक बार बनता है और एक ही मोका मिलता है सब को अपनी लाइफ में या तो उसके लिए मर मिटो  उसे पाने में जी जान लागलो या फिर चुप चाप बेठ कर जैसा समाज , लोग ,परिवार चाहे वो   सहन करते रहो. कुए का मेंडक बनना बहुत आसान है कुंकी वो वाही पैदा होता है और वाही मर जाता है पर समुद्र की जलपरी बनना बहुत मुश्किल . इन मुश्किलों को हटाने का सिर्फ एक ही रास्ता है बस अपने लक्ष्य क पीछे चलो और जो पाने की तमन्ना हो उसे पाने क लिए जी जान लगादो ,लोगो का तो काम है कहना क्कुह अच्छा होगा तो लोगो को नहीं आपको संतोष और आनंद मिलेगा  और कुछ जायगा तो कोई जिन्दगी ख़तम नहीं होजयगी , जितना आपकी काबिलियत है उतना तो आप कभी भी बना सकते हो उससे ज्यदा तो आपके लिए एक धनात्मक उपलब्धि है जीवन की !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!               













  

क्या पैसा ही सब कुछ होता है !!!!!!!!!!

क्या पैसा ही सब कुच्छ होता है ,अगर ये सवाल आप किसी भी आम आदमी से पूछोगे तो उसका जवाब हमेशा ही रहेगा हाँ पैसा ही सब कुछ होता है !पैसे से आप दुनिया की हर ख़ुशी , हर चीज़ हर वो मुकाम ला सकते हो जिस से की आप को ख़ुशी मिले आप जीवन में आनंद पा सकें ! जब कोई लड़की किसी से प्यार करती है , या फिर कोई लड़की की किसी लड़के से शादी होने वाली होति है तो क्या वो सोचती है की उसका पति उसे वो सब ख़ुशी दे पायगा क्या वो हर चीज़ जो हम telivision/ या हमारे आस पास आमिर लोगो को करता देखते है क्या वो सब में कर पाऊँगी , क्या मेरा बच्चा जिसकी अभी हाथ की लकीरे भी नहीं बनी है वो सरे सुख और ख़ुशी पा सकेगा जो हम दुसरे लोगो को देखकर अपने मन में सोचते है !


में ये नहीं कहता की पैसा ही सब कुछ नहीं होता ! पर पैसे की जीवन में एक ऐसी जगह बनी हुई है की उसके बिना हम अपनों के और पास आ सकते हैं ! हर व्यक्ति चाहता है और इस बात की पूरी कोशिश करता है की वो अपने परिवार की हर इच्छा को पूरी कर सके , वो हर चीज़ दे सके जिसके लिये उसका बच्चा रोता हो , हर वो चीज़ जिसके लिए उसकी पत्नी इच्छा करती हो ! हर वो चीज़ जिन के लिए उसके माँ बाप ने उसकी ख़ुशी में नयोछाव्वर कर दी हो !पर हर व्यक्ति इस में सक्षम नहीं होता पर वो अपनी पूरी जान लगा देता है उनसभी को पाने में !
जिया पैसो से हम अपने एक पल की ख़ुशी पातें है उसमे पता नहीं कितने गरीबों का एक वक्त का खाना मिल जाये , पर हमको किसकी परवाह है हम अपने जीवन को संतुष्ट करने में लगें है हम मिलो घूम आते है ख़ुशी के लिए , लाखो रुपये उड़ा देतें है फिर भी हमे वो ख़ुशी नहीं मिलती जो एक गरीब को खाने खिलने पर किसी सज्जन को मिलती है , और ऐसा नहीं होता की उस व्यक्ति क पास पैसा बहुत है की वो इधर उधर लोगो की सेवा में उड़ा  रहा है पर ऐसा नहीं है , उस सज्जन ने अपने जीवन में ये दिन जरुर देखें होंगे जब वो गरीब और असहाय होगा की भूख का दर्द क्या होता है !


जो आदमी जमीं से उठता है उसे उसकी कद्र हमेशा याद रहती है की कितना दर्द होता है जमीं में !

में बस इतना चाहता हूँ की  में इतना पैसे कमा सकूँ की अपनों की वो हर इच्छा पूरी कर सकू और कभी मोका लगे तो किसी गरीब की एक वक्त की खाने की भूक मिटा सकूँ ! 

मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!





मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते , सच में मुझे मेरे सपने सोने नहीं देते  आज भी ये सवाल मुझे बार बार याद अत है ,  living my dreams or still i m dreaming .
किसी ने कहा है की सुबह क सपने सच होते हैं ,पर मुझे तो सुबह सबसे अच्छी नींद अति है ,पर आज मेने सोच ही लिए की रात भर जगता रहूँगा और सपने देखने की कोशिश सुबह करूँगा काश ये तरीका काम आजाये ! दिन रात यही सोचता हु कैसे करूँ , कैसे निकलू सब छोड़ क कही दूर खली मैदानों में चला जाऊ और बस सेलफिश बन जाऊ सिर्फ अपने बारे में सोचु ,क मुझे क्या चाहिए फिर अंत में  दिल नहीं मानता साला और यही रुक जाता हूँ !


रोज सुबह यह सोच कर उठता हूँ की आज तो बस ,पर बस में दौड़ते दौड़ते दिन कहा चला जाता है , मालूम ही नहीं पड़ता ! और रात भर ये सोच सोच कर नींद खुल जाती है की आज का दिन तो गया कल तो सुबह से पक्का.पर ये पक्का आज तक पक्का नहीं हो पा रहा !


Life seams to be a packets of pipelines (weeks) once you enter you will come out at the end and then the same routine you follow till you survive.
और यह हमेशा चलता रहता है और जब हम अपने अप से पूछने लायक स्थति में आते है की हमने इस जीवन से क्या पाया है तो हमारे कहने क लिए कुछ  नहीं होता , इस चीज़ में तो जानवर अच्छे होते है क उनके पास दिमाग ही नहीं होता जिससे की वो अपने अप से पूछ सके की क्या किया इस जीवन में वो बस जी लेते है .

पता नहीं में इतना क्यों डर जाता हूँ , खुद को अकेला समझता हु कभी के में अकेला अपने आप से कैसे जीतूँगा कैसे में सब कर सकूँगा ,फिर में उसको लिखलेता हूँ.
पता नहीं क्यों पर जब इन शब्दों को में फिर से पड़ता हूँ तो अताविश्वास अता है की हाँ में कुछ करने की कोशिश में लगा हूँ और करता रहूँगा जब तक में कुछ पा ना लूँ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!









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