चलती का नाम जिन्दगी !!!!!!!!!!!!!!!!!!! :-(



जीवन जीना सिखा देता है 

सच ही कहा है की जीवन जीना सिखा देता है ,मेने इतना जीवन देखा नहीं है फिर भी जितना सा भी उसमे ये बात मुझे सच ही लगी .अपने जीवन में इतना व्यस्त हो ता जारहा हूँ की मुझे मेरे सपने के लिए समय कम लगने लगा है , रोज्मार्र्हा की जिंदगी इतनी सरल लगती है और आसानी से कट जाती है पर रत को नजाने क्यों एक सवाल मन में अत है क्या आज मेने अपने लिए कुछ किया , कुछ सोचा दिन भर दुसरो क सपनो के लिए जीते हुए ख़तम होगये . 
और ये दिल हमेशा बेचैन होता रहता है और रात भर सोने नहीं देता की जिन्दगी फिर नहीं मिलेगी बीटा कुछ तो करना है कुछ तो पाना है और इसी सोच में रात कत्जती है और अगला दिन फिर वाही भाग दौड़ में निकल जाता है इस बीमारी का इलाज तो मुझे भी नज़र नहीं  आरहा  की  कैसे में क्या करू जो सब कुछ छोड़ कर बस वाही करने लागु जो मेरा दिल कहता है , वाही करू जिसके सपने में हमेशा देखता हूँ .क्या इतना आसान है .
नहीं समझ सकता , नहीं कर सकता क्युकी ये डर फिर से दिल में बस जाता है की कभी जो मेने सोचा वो मुझे कहा लेजयेगा ,लोग क्या कहेंगे का अच्छा भला जी रहता पता नहीं कैसे कैसे सवाल मन में आने लगते है की जिनके जवाब मेरे खुद क पास भी नहीं होते .
अकेला महसूस होता है , अकेला खड़ा हूँ  अकेला लड़ना है , सभी को आशाएं है पर किसी को मन की भावनाओ से कोई वास्ता नहीं .कुछ करने का जुनून भी सोगया है उसे भी मुझ पर विश्वास नहीं रहा की जब में अपने आप के लिए हिम्मत नहीं करसकता तो वो भी मेरे अंदर रहकर क्या करेगा .कठिन राहों पर कोई साथ नहीं देता और देगा भी क्यों उसके खुद क सपने भी तो उसे ये कदम उठाने नहीं देते .और फिर येही सोच कर अपने आप को मानना पड़ता है कल से जरुर , कल से जरुर ..........................

पर वो कल कब आयेगा ??????????????????

Live your dreams!!!! लिव योर लाइफ !!!!



हर कोई कहता है समझाता है अपने दिल की सुनो !!!!! पर क्या दिल की सुन कर करना इतना आसान होता है मुझे तो नहीं लगा.
अगर में अपने दिल की सुनता हु और हर वो चीज़ करने की कोशिश करता हु जो में करना चाहता हूँ तो क्या में रिश्ते , व्यहवार और जो ये जिन्दगी अभी में जिरह हूँ उसे निभा पाउँगा , जब जब मेने ये सोचा के आज के आज वो दिन है इस दिन से में अपने दिल की सुनूंगा तो पता नहीं क्या के दिक्कते मुझे आने लगी मुझे लगा और लगता ही रहता है की में इस जीवन के जाल में उलझता जारहा हूँ A और जितना में इससे बहार निकलने की कोशिश करता हूँ पता नहीं और अंदर चला जाता हूँ A कहीं न कहीं ये रिश्ते , व्यहवार ऐसी तकलीफे उत्पन्न करता है की में उन्हें तव्ज्जो देने में अपने सपनो को वाही ख़तम करदेता हूँ A
और समय के काँटे मुझे हर रोज ये सोचने पे मजबूर करदेते हैं की क्या , कब , कैसे में अपने समय को अपने सपने पुरे करने में लगाऊंगा A हर दिन में  मेरी संभाविक दिनचर्या में और हर रात अपने सपने की आहुति के आंसू में निकालता A
हर वक्त बस मुझे एक ही चीज़ महसूस होति है की हर चीज़ मेरे लिए पहले से ही बनी हुई है , बस मुझे करते रहने है A कभी किसी ने नहीं पूचा में क्या चाहता हु A और बस ये समय उही चले जारहा है A  कोई कहता है ये तो में कह ता हूँ हाँ , कोई कहता है वो तो में कहता हूँ हाँ और इसमें मेरे जीवन के अनमोल पलों को में ख़त्म करता रहा हूँ और क्या पता करता रहूँगा A और वो हिम्मत जो मुझमे नहीं है की में सब कुछ छोड़ कर बस वाही सोचु के में क्या करना चाहता हूँ कैसे करना चाहता हूँ A

फ्लोविंग विथ द फ्लो ऑफ़ रिवर !!! जहाँ मुहे ये जमाना लेजरह है वहीँ में चला जारहा हूँ बस .

2014 में अरहा हूँ

एक साल 2013 और ख़तम पता नहीं मुझे खुश होना चाहिए या दुखी !!!!!!!!!!!!

दुखी इसलिए की मेरा एक साल खत्म हो रहा है और ख़ुशी इस बात की के में अगले साल में जरहा हूँ .इस साल बहुत से उतर चड़ाव करे , ये बात तो अब महसूस हुई जब हम असलियत में पड़ लिख कर बाहरी दुनिया में जातें है तो ,दोस्त ,परिवार ,स्वस्थ्य सब को एक साथ संभालना मुश्किल होजाता है पर , दोस्तों बिखर जातें हैं , घर पर कम वक्त दे पाते , पर इनसब से दूर जब भी किसी दोस्त का कॉल , कभी अचानक से उससे मिलना , घर पर एक साथ मिलकर बातिएँ करना बहुत अच्छा लगता है !
एक दुसरो पर जान छिडके ने वाले दोस्त कम ही मिलतें है.......
इस पुरे साल हम सभी ने कई उतर चड़ाव का सामना किया पर आखिर सभी अपनी जगह पर खुश है कुछ अभी भी अपनी मंजिलो को पाने में लगे हुए है ,अपने सपने पुरे करने के लिए जी जन लड़राहे है ऊन सब को मेरी और से बधाईयाँ और मेरे सभी दोस्तों , गुरुजनों ,शुभचिंतक को मेरी और से नव वर्ष की शुभ कामनाएं !!!!!!!!!!!!!!
सभी के सारे सपने पुरें हों , काफी कुछ हासिल करना है इस जीवन में !!!!!!!!!!
में तो येही कहना चाहूँगा -

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Happy New Year !!!!!!!!!!!
Stay connected and tuned
2014

विशाल 

जीना इसी का नाम है ???

जीना इसी का नाम है ??????????????????????
क्या जीना इसी का नाम है , बिना किसी की परवाह किये जीने क्या इसी का नाम जीना है  ?जब भी हर कुछ अच्छा नज़र आता दीखता है , सब कुछ खुशहाल नज़र अता दीखता है तो फिर ये बिच में कैसी उलझाने आजाति है , बिच में कभी गम कभी समझोते आजाते है  I पुराने युग में जब लोग को ना पैसा , ना दोस्त , ना लोग , नहीं  परिवार दीखता था वो तो बस जीना जानते थे , पर आज हम इसको छोड़ कर सभी चीजों की परवाह करते है , वैसे तो हर चीज़ अपनी जगह पर सही होति है , और कीसी को किसी भी व्यक्ति के जीवन में अर्चाने डालने का कोई अधिकार नहीं होता , हर कोई मुक्त है जो वो चाहे वो करने के  लिए ऐसा सोच कर में जीता हूँ I पर क्या जिस व्यक्ति क लिए हमने ये सोचा की  उसका जीवन किसी और की वजह से प्रभावित नहीं होता , तो क्या ऐसा असलियत में होता है I क्या पता हर व्यक्ति कैसे क्या सोचकर जीता है I
एक छोटी सी जिन्दगी मिली है  , उस में भी हम वो क्या कहेगा , वो क्या सोचेगा , ऐसा नहीं होसकता , वैसा नहीं होसकता में अपन अध जीवन निकल देते है और जब हिम्मत अति है कुछ कर्गुजरने की जब तक सब कुछ हाथ से निकल जाता है I और कहने को सिर्फ बचा हुआ जीवन रह जाता है जिसे मन मारकर बिताने के आलावा कोई रास्ता नहीं नज़र आता है I  और क्या वो लोग खुश रेह्पाते है अपने  जीवन में I
क्या जीना इसी का नाम है ???????????????



जीवन  काटना , या जीवन जीना सुनने में और समझने में बहुत ही  अच्छे और काफी अलग प्रतीत होते हैं , पर क्या हम इन शब्दों को समझ ते है और कभी भ इनके सोचेते हुए जीवन व्यापन करतें है I मेरे अनुचाव से तो मेनेबहुत ही कम ऐसा देखा है की लोग अपने सपनो को पाने के लिए अपना पूरा जीवन लगादेते हैं पर ,और कुछ जीवन काटने पर भरोसा रखतें है के चलो आज भी गया , कल भी चल जायेगा और एक दिन हम भी चले जायंगे वैसे कुछ ऐसा करना की हम कभी ना  भुला पायें ऐसा बहुत ही कम देखने को अत है I
जो भी ख़ुशी पाने के लिए करें और खुश रहें वो ही सही है I
में खुद भी येही सोचता हूँ , और इस वाख्या पर मुझे एक गाना हमेशा याद अत है “हँसते हँसते कट जाये रस्ते , और जिंदगी ऊँही चलती रहे”  I हर पल में जीने का मज़ा ही कुछ और ही है I हर खुनशी को बांटना , उसे पाने में पूरी जान लगा देना इसेही जिन्दगी कहतें है शायद , पता नहीं पर खुद की हर एक कमियाबी के बाद कुछ ऐसा महसूस होता है जो बतया नहीं जा सकता और  ये पल जब भी अत है तो  समय ऐसा चलता है की पता ही नहीं लग पता है की आप ने अपने जीवन के ये पल कितने अच्छे निकाले हैं I और ये इतना असं नहीं होता हर चीज़ समय मांगती है हर ख़ुशी विलंभ मांगती है I  
में तो इसी को कहता हु के हाँ जीना इसी की नाम है I I I I I I I



दोस्तों के साथ एक रोमांचक सफ़र ! अकाल्पनिक

रोमांचक सफ़र


रोमांचक सफ़र

हम लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस सफ़र पर हम निकल रहे हैं, वह हमारी ज़िंदगी के यादगार सफ़रों में से एक बन जाएगा—ऐसा सफ़र जिसे हम कभी भूल नहीं पाएँगे।

आइए, पहले उन लोगों से आपको मिलवाता हूँ, जिनकी वजह से यह यात्रा और भी ज़्यादा रोमांचक बन गई।

नईमुद्दीन सर

हमारे फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉन। शाहरुख़ ख़ान के जबरदस्त फैन। पहले इप्का के लिए मार्केटिंग करते थे और अब मास्टर ऑफ़ फार्मेसी कर रहे हैं, लेकिन मार्केटिंग का भूत आज भी कभी-कभी उन पर सवार हो ही जाता है।
इनकी सबसे खास बात यह है कि जब तक ये चुप रहते हैं, दुनिया बहुत शांत लगती है; लेकिन जैसे ही बोलना शुरू करते हैं, फिर किसी के पापा भी इन्हें रोक नहीं सकते। और हाँ, ये जयपुर से हैं।

देवेंद्र

दूसरे नंबर पर आते हैं देवेंद्र। बाहर से शांत और सीधे-सादे लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इतनी बड़ी-बड़ी बातें कर देते हैं कि सामने वाला सोच में पड़ जाए। ये ग्वालियर के रहने वाले हैं।

संदीप

तीसरे नंबर पर हैं संदीप—अफजलपुर, ज़िला मंदसौर से। काफ़ी समझदार हैं, लेकिन एक जगह आकर हर लड़के की तरह इनकी भी समझदारी थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है। जी हाँ, लड़कियाँ ही इनकी कमजोरी हैं। इसके अलावा इन्हें पूरी तरह समझदार कहा जा सकता है।

इमरान खान

चौथे नंबर पर हमारे इमरान साहब—ग्वालियर से। नवाबी शौक़ रखते हैं और आमतौर पर बड़ी समझदारी से पेश आते हैं। लेकिन जैसे ही किसी समझदार इंसान से बातचीत होती है, न जाने क्या हो जाता है—उलटी-सीधी बातें निकलने लगती हैं।

नंबर पाँच (सौरभ)

अब आते हैं हमारे नंबर पाँच पर—जो हर जगह अपनी पाँचों उँगलियाँ घी में चाहते हैं, चाहे मामला उनके कान का हो या किसी और का।
इनकी सबसे बड़ी बीमारी है डाउट—और वो भी पढ़ाई वाले नहीं, हर तरह के। हर चीज़ इन्हें दूसरों से ज़्यादा चाहिए। स्वभाव से बेहद भले हैं, कोई भी इन्हें आसानी से उल्लू बना सकता है। साथ ही ये बहुत सहायक भी हैं—हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार।

और अब अपने बारे में क्या कहें—हम तो जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे।


सफ़र की शुरुआत

हमारा सफ़र शुरू हुआ 18 दिसंबर 2012, सुबह 3 बजे। ट्रेन हमें मंदसौर स्टेशन से पकड़नी थी। सभी लोग समय पर पहुँच गए। वहाँ से हमें रतलाम जाना था।

ट्रेन में बैठते ही गप्पें शुरू हो गईं। न इधर देखा, न उधर। सुबह-सुबह यात्रियों की गालियाँ भी सुन लीं—
“सोने दो सालों, कहाँ-कहाँ से आ जाते हो!”
गुस्सा तो ऐसा आया कि पूछिए मत।

किसी तरह रतलाम पहुँचे। सुबह 5:30 बजे सीधे बजरंग वाले की दुकान पर चाय पी। अगली ट्रेन 7 बजे थी, तो वेटिंग रूम में जाकर टाइम पास किया और फिर ट्रेन पकड़ ली—जो हमें सीधे अंबाला कैंट ले जाने वाली थी।

ट्रेन में हमारी सीटों का जुगाड़ बड़ा दिलचस्प था—दो सीटें दूर थीं और चार एक साथ। इमरान, संदीप और मैं साथ बैठना चाहते थे, तो सौरभ और नईमुद्दीन को “सोने का बहाना” बनाकर दूर भेज दिया।

धीरे-धीरे आसपास के यात्रियों से जान-पहचान बढ़ी। रात को घर से लाया खाना खाया—हम दोनों ने जरूरत से ज़्यादा खाना पैक कर रखा था।

ठंड बढ़ने लगी थी, थकान भी थी, लेकिन दोस्तों के साथ होने से कुछ पता ही नहीं चला। सुबह 4 बजे ट्रेन हमें अंबाला कैंट पहुँचा गई।


अंबाला से चंडीगढ़

सुबह के चार बजे, कड़ाके की ठंड। मालवा क्षेत्र से आए हम लोगों के लिए ये बिल्कुल नया अनुभव था। आराम की कोई जगह नहीं मिली, तो वेटिंग हॉल में ज़मीन पर चादर बिछाकर सो गए। न शर्म थी, न झिझक—बस नींद थी।

करीब 9 बजे होटल ताज पहुँचना था। स्टेशन पर तैयार होकर बाहर निकले। फोटो सेशन शुरू हुआ—“मेरा फोटो खींच, मेरा खींच।”
नाश्ता करके बस में बैठे और एक घंटे में चंडीगढ़ पहुँच गए।

GPS की मदद से होटल ताज पहुँचे। कॉलेज की ब्लेज़र में ताज होटल में एंट्री—अलग ही एहसास था। अंदर पहुँचते ही एक मैडम आईं और बोलीं,
“आपका स्टॉल नंबर 3 है, जाकर सेटअप कर लीजिए। गवर्नर आने वाले हैं।”

हमारा पहला अनुभव था, और हम कुछ भी नहीं लाए थे—सिर्फ़ हम और हमारी ब्लेज़र। डर तो लगा, लेकिन जैसे-तैसे काम चलाया।

सेमिनार शानदार था—बड़े-बड़े साइंटिस्ट और रिसर्चर। हमारे लिए ये सब बहुत बड़ा अनुभव था।


चंडीगढ़, अमृतसर और देशभक्ति

चंडीगढ़ में हमने रोज़ गार्डन, रॉक गार्डन और सुखना लेक देखी। सामान ज़्यादा था, तो सौरभ को फिर से “जिम्मेदारी” दे दी।


थोड़ी देर बाद खबर आई—पुलिस ने सौरभ को रोक लिया!
ज़्यादा कुछ नहीं था, बस शक हुआ था। सब ठीक रहा।

वहाँ से अमृतसर के लिए ट्रेन पकड़ी। ठंड ने हालत खराब कर दी। सुबह करीब 3 बजे अमृतसर पहुँचे। गोल्डन टेंपल के लिए मुफ्त वाहन मिला और सुबह 4 बजे मंदिर पहुँच गए।


वहाँ की व्यवस्थाएँ—नहाने, रहने, खाने की—अद्भुत थीं। जितना सुना था, उससे कहीं ज़्यादा अनुभव मिला।
अंदर का माहौल—शांत, सुकून भरा, आध्यात्मिक।

इसके बाद वाघा बॉर्डर गए। वहाँ असली देशभक्ति का अनुभव हुआ—शब्दों में बयान करना मुश्किल है।


To be continued…







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