इम्तिहान : By Vishal Sharma

इम्तिहान की भी अब तो इम्तिहान होगी,
आँख खुली और बस रात हो गई।

इतनी थी ज़िंदगी से आस,
इतने थे आँखों में सपने,
पर बोझों तले वो भी काश हो गए।

इतना खो गया हूँ दुनिया की धूप में,
कि हर कदम पर सोचने लगा हूँ मैं—
कहाँ पता किस ओर जाऊँगा,
किस मोड़ पर खड़े होंगे मेरे सपने,
कैसे मैं उन्हें पाऊँगा।

जाना है उनके पार मुझे,
रुकना नहीं है अब मुझे।
मुझे छूटना है उन बातों से,
जिनमें इतना उलझने लगा हूँ मैं।

किस मोड़ पर खड़ा हूँ मैं…
.........................................


By : Vishal Sharma

Cataract (मोतियाबिंद) का मुफ्त इलाज । सही जानकारी आपके रुपए बचा सकती है ।


मोतियाबिंद आंखों का एक सामान्य रोग है। प्रायः पचपन वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद होता है, किन्तु युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं हैं। और जानकारी के लिए आप इसे यहाँ क्लिक करके भी पड़ सकते हैं । 
दुनिया में हर मुश्किल का हल है , बस आभाव है तो जानकारी होने का ,में खुद भी इसी लीफ से गुजरा हूँ ।  ये पोस्ट इसी कारण से शेयर कर रहा हु ।वैसे तो बहुत जानकारी T.V पर भी अति है पर जबसे .कॉम (dot com)  आया है तब से T.V चैनल्स भी कोम्मेर्सिअल (commercial) होंगय हैं । 
मोतियाबिंद की एक छोटी सी सर्जरी होति है , 10-15 मिनट की, आपकी आँखों का जो लेंस ख़राब होचुका है उसे निकल कर नया लेंस लगदिया जाता है , जिसमे की व्यक्ति को 1-2 दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है । प्राइवेट अस्पताल इन्ही लेंस को महंगे दामो पर बेच कर व्यक्ति से बहुत सारा पैसा वसूल लेते हैं ।
कई सरकरी योजनाय होति है पर जानकारी के आभाव में व्यक्ति कही भी बहुत सारे पैसे खर्च कर के अपने परिजनों का इलाज कर्वालेता है । पर  सही जानकारी और सूझ भुज से हम ये पैसे भी बचा सकते हैं और इला भी शत प्रतिशत सही अरवा सकते हैं । 



जैसे की गुजरात ,राजस्थान और मध्यप्रदेश में रहने वाले लोग गुजरात में गोधरा के समीप तेजापुर जो की गोधरा से 47 किलोमीटर की दुरी पर है  ।  जहा है बहुत ही प्रसिद्ध श्री नारायण ई हॉस्पिटल ,जहाँ पर मोतियाबिंद का इलाज पूर्णः तः निशुल्क होता है । बस आपको एक बार वहा जाँच करा कर तारीख लेनी होति है जिस दिन की ऑपरेशन होगा । शुक्रवार को वहा का अवकाश रहता है । वैसे तो वहा जाना बहुत ही आसान हैं अप ट्रेन से गोधरा जाकर वहा से किसी भी लोकल साधन से वहा जा सकते हैं ।  या फिर आप खंकराई जोकि गोधरा के समीप है वहा तक भी ट्रेन से जाकर  , किसी लोकल साधन से अस्पताल तक जा सकतें हैं ।
और ये कभी नहीं  सोचिये की आप ज्यादा पैसे कमाते हैं तो किसी बड़े हॉस्पिटल (प्राइवेट ) में इलाज करवाकर अपने आप को  को रहिस साबित करेंगे । अपताल देखिये ,जानकारी लीजिये सही लगे तो जाने  में कोई हर्ज नहीं है , यही बचा हुआ पैसा आपके ऑपरेशन क पश्चात दवाई /फल इतियादी में काम अजयग या आप किसी जरूरतमंद के इलाज क लिए भी ये पैसे दान कर सकते हैं । 
श्री नारायण साईं हॉस्पिटल
ताजपुर गोधरा गुजरात 
27576-296600

इसी प्रकार की और जानकारी के लिए अप मुझे सब्सक्राइब या मेसेज कर सकते हैं , सिर्फ सीधे हाथ पर दिए हुए कॉलम (फोलो मी ) में अपना ईमेल आईडी प्रविष्ट करें और सबमिट करें ।
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संविदा नोकरी से हरताल तक !!! एक अनुभव #continued 26.06.2016

संविदा नोकरी से हरताल तक  !!! एक अनुभव  #continued 26.06.2016

आखिर जित राजनीती की हुई । हम लोग छोटे से कर्मचारी हैं , नहीं की राजनीतिज्ञ , और हार का पलड़ा भी उनकी और ही झुका होता है जिनको राजनीती नहीं अति । देश  के हक़ की लड़ाई करते करते कई लोगो  शहीद होगय पर कभी किसी ने  हार नहीं मानी  और हम भी लड़ते रहंगे  सरकारे आयंगी सरकारे जायंगी ।  इतनी महनत  कर के जो संघठन खड़ा हुआ था वो आज तितर बितर होगया है , और अब तो धीरे धीरे तानशाही का आलम आ गया  है जब मन में अत है लोगो को निकल दिया जाता है । जिन लोगो को पहले जब योग्य मानकर बरसो कार्य करवया और पल भर में  अप्रिसिअल के नाम अयोग्य घोषित कर के निकलना शुरू करदिया है । मानवाधिकार नाम की कोई चीज़ ही नहीं हैं जो लोग परमानेंट होकर काम से जी चुराते है , घुस खोरी करतें हैं सरकार उनको  बिना किसी अप्प्रिसिअल के मोटे मोटे वेतन देने को तयार हैं पर जो व्यक्ति दिन रात  महानत  कर के  विभाग के कार्य को  गति प्रदान कर रहा हैं । वो अपने हक़ के लिए लड़ भी नहीं पा रहे है जहा पहले परमानेंट होने से लेकर कही मांगो क साथ जो संघठन खड़ा था । आज वाही बिखरा हुआ संघठन ऊन लोगो की नोकरी  बचाने में लगा हुआ है , जो कुछ दिनों पहले जैसे तैसे म्हणत करके अपना पेट पलते  थे । अब तो कई लोगो के पास तो कुछ काम भी नहीं रहा करने को जो भी बचा कुचा पैसा है वो भी कोर्ट की तारीखों में निकलने लगा हैं  ।
और जो बचे हुए हैं मेरी तरह वो  ये सोचने में लगे हैं की कुछ नया जुगाड़ करले जल्द से जल्द वर्ना जो आज कुछ लोगो के साथ हुआ है कई और के साथ भी हो सकता है ।  वैसे विभाग या सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता एक को निकल कर अगर आवेदन निकल भी दें तो हजारों फॉर्म अजयंगे । करोड़ो की  कमाई होजयगी , और बेरोजगारी का अकड़ा भी  केंद्र को कम दिखाया जायगा , जिनको पहले मिली थी उनको और जिनको अभी देंगे उनको सबका मिलाकर  दिखाया जायगा ।
 अब सिर्फ एक ही रास्ता है जो हम लोगो के पास  बचा है इतने साल यहाँ पर बर्बाद करने के बाद , की या तो कोई नयी नोकरी ढूंड कर वहा  चले जय सब समय महनत  जो की आज तक को पराया कर के , या फिर से एक मजबूत संघठन  को खड़ा कर के , उनलोगों को दिखाया जाय के हम हार मान ने वालो में से नहीं हैं ।  में दुसरे बिंदु पर ही विशवास करता हु और सब से आग्रह भी करता हु की जब धीरे धीरे कर के जाना सभी को ही (नोकरी छोड़ना )  है , तो क्यों ना एक बार और जंग लड़ी जाय  और इस बार पूरी ताकत से एक मजबूत संघठन को खड़ा करके लड़ा जाये ।

नोकरी मायने नी रखती  , आत्मसम्मान मायने रखता है दो वक्त की रोटी तो एक भिक मांग कर खाने वाला भी कम लेता हैं और हम लोग तो योग्य लोग हैं जो कम से कम अपने हक़ के लिए तो लड़  ही सकते हैं ।

इस कविता से हमे प्रेरणा लेनी चाहिए

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

--हरिवंशराय बच्चन  जी


To read the full story go to http://vishalsharmamandsaur.blogspot.in/2016/03/blog-post.html





भारतीय राजनीती आज कल !!!!!!


## में किसी पार्टी का समर्थन नहीं करता , पर आज कल जो भारतीय राजनीती का हाल हैं में अपने आप को बोलने से रोक नहीं सकता  , में कोई मंत्री  या किसी राजनितिक पक्ष का उमीदवार भी नहीं हो जो की किसी मंच पर जाकर कुछ कह सकू ।
एक बात पर मुझे पूर्ण विश्वास है , मोदी जी देशभक्त हैं ।और उनसे अच्छा प्रधान मंत्री या देश सेवक मेने अपने पुरे जीवन में नहीं देखा और वो ही एक  ऐसे  देश भक्त हैं जो की देश को बुलंदिओं के शिखर पर लेकर जायंगे ।आज कल के युवक राजनीती को एक सब्जेक्ट की तरह लेते हैं । या तो नाम कमाने के लिए या पैसे कमाने के लिए । इसी  श्रंखला में लोग   जो की अपना केरिएर  राजनीती में बनाना चाहते हैं , मीडिया के रास्ते नए नए बयान देते हैं और अपने आप को हाईलाइट करते है ।  2012 जब आम आदमी पार्टी का आगाज हुआ तो लगा अब कुछ पड़े लिखे लोगो के हाथो में देश  की भाग डोर अजायगी और  लोगो ने इसे पसंद भी किया । और ये मुझे किसी को बताने की जरुरत नहीं की आम आदमी पार्टी लगातार 2 बार चुनाव जीती है ।
और सिर्फ वाही एक पार्टी है जो की अपने किये हुए वादों को करने में  लगी हैं और काफी हद तक पुरे भी कर चुकी है । फिर भी आज कल जब भी में समाचार देखता हु तो पुरे भारत में सिर्फ #AAP के विधायक ,मंत्री ही मुजरिम बने हुए हैं ,और किसी भी  पार्टी ,राज्य का एक भी मंत्री पे कोई इलज़ाम नहीं हैं । सिर्फ और सिर्फ  भी कुछ गड़बड़  दिल्ली में होति है तो उसकी जिम्मेदार #AAP होति है , और कही भी कुछ भी हो जैसे मध्य प्रदेश ही देख लीजिये व्यापम घोटाला जिससे की कई बच्चों का भविष्य ख़राब किया है जिन्होंने पास होने की रिश्वत दी उनका भी और जिन्होंने नहीं दी (उन्होंने होशियार होते हुए भी डॉक्टर बनने  से वंचित रहकर ) पर उनके  बारे में किसी का ध्यान नहीं नहीं नहीं मीडिया कुछ बताती है शायद मीडिया को इस बात के पैसे नही  मिलते होंगे ,क्युकी जिन बच्चों की जिन्दगी ख़राब हुई है वो इस लायक थोड़ी जो इतना पैसे दे सके ।   सिर्फ व्यापम का नाम प्प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड रख कर सारा मामला सेटल होगया   । नहीं कोई गुनेगार पकड़ा गया जिसने ये सब करवाया नहीं किसी का कुछ बिगड़ा बस हुआ तो क्या की जो शुल्क पहले कम था पास होने का अब वो  बड कर 2-3 गुना होगया है ,क्योंकि भाई रिस्क कितनी होगई है । ऐसे ही बहुत सरे #SCAM #घोटाले सरे राज्यों में हैं वहा गिरफ़्तारी , मीडिया कवरेज कुछ नहीं होता बॉस जहाँ काम होरहा है वहा पर इतना जल्दी और इतना कठोरे कारवाही की जारही हैं ।और #AAP के पास प्रधान मंत्री जी से बिनती करने क अलावा कोई रास्ता नहीं है क्यूंकि वो जानते हैं की सिर्फ एक ही सक्श जो उनकी सुन सकता है ,  पर वो भी पार्टी से बहार जाकर उनकी मदद नहीं कर  सकते ।
और जो पार्टी और जिसके  पड़े लिखे लोग देल्ली में काम करना चाहते है उन्हें सोची समझी सदिश के तहत काम नहीं करने दिया जारहा है , क्यूंकि सबको पता है अगर #AAP ने सरे कारनामे कर दिखे तो 2019 के चुनावो में पुरे देश में #AAP ही  का परचम लहरेगा । में ये भी नहीं कहता की साडी पार्टी ख़राब है सरे नेता हैं ख़राब हैं काफी  लोग  बहुत ही अच्छे है और अपने काम पूर्ण ईमानदारी से कर रहे हैं । पर जो पार्टीज एंड पॉलिटिक्स  है वो आज कल किसी प्रोफेशनल कोंपीटशन से कम नहीं ,ब्रांड की तरह उन्हें उठाया और गिराया जा रहा है । मेरा बस इतना निवेदन है प्रधान मंत्री जी से की जो लोग इस  देश के लिए काम करना चाहते है , उन्हें आप प्रोह्त्साहित करें , जैसा की आप हमेशा करते हैं (हाली ही में अपने कोलेजे के छात्रों को जिन्होंने रोकेट बनाया है )।
इस का सारांश में तो येही निकलता हूँ की सिर्फ मोदी जी ही हैं जो की अपने देश को आगे बड़ने और देश की युवा पीडी को आगे बदने का अवसर दे सकते हैं ।

संविदा नोकरी से हरताल तक !!! एक अनुभव



बहुत आशाओं के साथ पड़ लिख कर , क्वालीफाइंग एग्जाम पास कर के आज वो दिन था ,जब  हाथ में नोकरी का जोइनिंग लैटर था .खेर संविदा नोकरी थी पर आज जो इसे पाने की ख़ुशी थी तो आगे भविष्य का कुछ ख्याल नहीं आया ! फिर सोचा बाद में पड़ कर और कहीं अच्छी नोकरी मिल जायगी वैसे ये भी कोई बुरी नहीं थी ठीक ठाक सैलरी थी हर साल इन्क्रीमेंट का भी लिखा था और सरकारी है सरकार ऐसे ही थोड़ी रहने देगी अच्छा ही करेगी , हमने सुना भी था काफी क सरकारी नोकरी बड़े किस्मत वालों की मिलती है । बस फिर क्या था , नोकरी  ज्वाइन करने की देर थी ।अगले ही दिन जाकर नोकरी  पर जाने लगे ।
धीरे धीरे काम का लोड बढता रहा , दिन रात शिफ्ट लगती रही पड़ने की खूब कोशिश करी के और कोई अच्छी जगह पर चले जायंगे पर समय कहा चला जाता पता ही नहीं लग पता । देखते ही देखते साल निकलते चले गए कुछ दिनों बाद परमानेंट  नोकरी भी निकली पर  पड़ने का तो समय ही नहीं था और नाहीं  गत वर्षी का कोई एक्सपीरियंस काम आना था । क्यूंकि ऐसी कोई पालिसी ही नहीं थी सरकार के पास के जो पुराने लोग है एक्सपीरियंस वाले उहे कोई फायदा मिल सके ,एग्जाम भी दिया जितना हो सका उतना पड़ कर ,और अंत में वाही हुआ जो विचार मन में पहले ही अगये थे । कुछ नम्बरों से रहगये ।
चलो एक बात में मन में सोची चलो अभी ये नोकरी तो है ना हाथ में सरकार  और कुछ तो करेगी , ऐसी कोई पॉलिसीस जो की हमारे हित में हो आयगी ,फिर कुछ  बात बन जायगी ।और फिर लगे नोकरी करने में दिन रात ,समय फिर बितता गया । हर साल अप्रिसिअल फॉर्म भरते थे और सोचते थे सैलरी बढेगी पर कभी नहीं बड़ी ।नोकरी करते करते आज 3 साल  होगये । फिर मन में एक डर पैदा हुआ की अब क्या होगा  जिन्दगी भर ऐसे ही मजदूरी करना होगी जितना काम उतनी सैलरी और वो भी  फिक्स , इससे तो अच्छा कही प्राइवेट कंपनी में नोकरी करलेता काम लेते पर इन्क्र्मेंट , प्रोविडेंट फण्ड ,हेल्थ इन्सुरेंस जैसी सुविधाएँ तो मिलती तो लगे फिर दिमाग दौड़ाने और  अप्लाई करना चालू किया ।और स्थिति ये थी की वहा भी वो एक्सपीरियंस काम  ना आया । वहा से भी निराशा प्राप्त होने लगी ।  देखते ही देखते घर की जिमेदारियों का बोझ भी बड़ने लगा ।अब स्थिति कुछ ऐसी थी की 3 साल पहले जहाँ थे आज भी वहीँ पर है । और  काफी लोगो से चर्चा की तो पता लगा की कुछ लोग तो  10-15 सालो से ऐसे ही काम कर रहे हैं । ये सब सुन सुन कर और भी तकलीफ होने लगी की कहने को तो सरकरी हैं हम फिर भी स्थिथि किसी बंधवा मजदुर जैसी है ।
अब सोचा की चलो शाम शाम को  कुछ और काम करलेना चाहिए , शाम को कुछ काम करके जो पैसा आयगा उससे थोडा घर में सपोर्ट हो जायगा ।पर नियम के अनुसार आपको कोई कार्य करने की अनुमति नहीं है बंधवा मजदूरी में और  हेड क्वाटर पर भी रहना पड़ता है भले ही वो कोई दूर दराच वाला गाँव क्यों  ना हो जहाँ पर कोई और साधन नहीं हो काम करने का । फिर भी हिम्मत ना हारते हुए पास ही के जिले में एक छोटासा कंप्यूटर का काम ढूंडा और शाम को फ्री होकर वहा जाना शुर किया लोड बढता रहा सुबह उधर शाम को इधर समय कहा जाने लगा पता ही नहीं चलता था ,मन में गलत गलत विचार आने लगे कहीं उस समय नोकरी की ख़ुशी ण हुई होति और ज्वाइन ना किया होता तो  आज बहुत अच्छी जगह होते और अपने मित्रो को देख कर तो और घ्रणा होने लगती वो लोग तो अब बसने लगे थे अपने परिवार के साथ और यहाँ तो अभी तक कोई ठिकाना ही नहीं हैं । के आखिर आगे होगा क्या ।

ऐसी ही दिन चर्या रहती सुबह से शाम तक महनत करना पड़ता 2-3 जगह पर काम करना पड़ता जिस से की घर चल सके , पर हर कोई ये नहीं कर पता । फिर एक दिन पता लगा की सब लोग स्ट्राइक करने जारहे है । 
में अकेला नहीं सभी संविदा कर्मचारी त्रस्त  हैं ऐसी जीविका से । सबने एकता दीखते हुए भोपाल में धरना दिया और विचार बना लिया की इस बार आर या पार की लड़ाई की जायगी । इसी तरह का सोषण चलता रहा तो कैसे हम लोग जियेंगे , हमारा भविष्य बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है इस नोकरी में ।

वो जोइनिंग का दिन था और आज हरताल का पहला दिन उसी लगन और जोश के साथ हम धरना स्थल पर अगये , फिर सोचा इतनी पढाई लिखाई कर के भी अपना हक़ , यहाँ तक की वेतन वृधि के लिए भी हमे ऐसे टेंट लगा कर  वेतन कटवा कर लड़ना होगा । जब इतने बाद बड़े घोटाले होते हैं तब कोई फिकर नहीं करता , इतना पैसे पानी की तरह कहा कहा खर्च करदिया जाता हैं सरकार द्वारा जब कोई ध्यान नहीं देता पर यहाँ कुछ संविदा कर्मचारी की थोड़ी सा वेतन ना बढाने  के 100 कारण तयार रहते हैं अफसरों के पास । 
हरताल की योजना   भी शांतिपूर्ण तरीके से  की गयी थी , और उसके फल स्वरुप आज 10 दिन  हो चुके हैं कोई हमको सुन ने को भी तयार नहीं और कारण ऐसे बाते जाते हैं की आप के  कॉन्ट्रैक्ट में  लिखा हैं की आप हरताल पे नहीं जा सकते , पर किसी को ये नहीं दीखता की कॉन्ट्रैक्ट में ये भी तो लिखा है की हर वर्ष आपकी वेतान वृधि की जायगी । यहाँ शांति पूर्ण तरीके से किस को क्या मिला है आखरी समय तब था जब गाँधी जी  ने शांतिपूर्ण तरीके से इस देश को आजादी दिलाई थी पर अज कल हिंसा के ही उधारण दीखते हैं ( पटेल / जाट आरक्षण ) जहाँ पर 1-2 दिन के अंदर सरकार को झुक कर उनकी बातें स्वीकारना पड़ी , जितनो का नुकसान  वहा पर लोगों ने किया उस  धन से  पुरे देश के संविदा कर्मचारी परमानेन्ट करदिये जा सकते थे पर इतना प्रबंध कोण करेगा इस देश में सबको अपनी पड़ी है आम आदमी की कोई नि सुनता नहीं कुछ करने देता हैं । बस एक आम आदमी की आवाज़ दबादी जाती है । और हम अभी भी गाँधी जी के पद चिन्हों पर चलते हुए  अहिंसा से हमारी मांगो को मंगवाने के लिए लड़ते रहेंगे । और इस बार की लड़ाई एक तरफ़ होगी और जित हमारी ही होगी , क्यूंकि  हम आखरी तक डंटे रहेंगे ।
इस बार तो हमको हमारा हक पाना ही है हमारे लिए और आने वाले संविदा करमचारीओं के लिए !


इस देश में जीने के लिए सहनशीलता  चाहिए ! जो जितना सहन करेगा वो उतना बदलाव लाने की कोशिश करेगा । 

संविदा नोकरी से हरताल तक  !!! एक अनुभव  #continued 26.06.2016

आखिर जित राजनीती की हुई । हम लोग छोटे से कर्मचारी हैं , नहीं की राजनीतिज्ञ , और हार का पलड़ा भी उनकी और ही झुका होता है जिनको राजनीती नहीं अति । देश  के हक़ की लड़ाई करते करते कई लोगो  शहीद होगय पर कभी किसी ने  हार नहीं मानी  और हम भी लड़ते रहंगे  सरकारे आयंगी सरकारे जायंगी ।  इतनी महनत  कर के जो संघठन खड़ा हुआ था वो आज तितर बितर होगया है , और अब तो धीरे धीरे तानशाही का आलम आ गया  है जब मन में अत है लोगो को निकल दिया जाता है । जिन लोगो को पहले जब योग्य मानकर बरसो कार्य करवया और पल भर में  अप्रिसिअल के नाम अयोग्य घोषित कर के निकलना शुरू करदिया है । मानवाधिकार नाम की कोई चीज़ ही नहीं हैं जो लोग परमानेंट होकर काम से जी चुराते है , घुस खोरी करतें हैं सरकार उनको  बिना किसी अप्प्रिसिअल के मोटे मोटे वेतन देने को तयार हैं पर जो व्यक्ति दिन रात  महानत  कर के  विभाग के कार्य को  गति प्रदान कर रहा हैं । वो अपने हक़ के लिए लड़ भी नहीं पा रहे है जहा पहले परमानेंट होने से लेकर कही मांगो क साथ जो संघठन खड़ा था । आज वाही बिखरा हुआ संघठन ऊन लोगो की नोकरी  बचाने में लगा हुआ है , जो कुछ दिनों पहले जैसे तैसे म्हणत करके अपना पेट पलते  थे । अब तो कई लोगो के पास तो कुछ काम भी नहीं रहा करने को जो भी बचा कुचा पैसा है वो भी कोर्ट की तारीखों में निकलने लगा हैं  ।
और जो बचे हुए हैं मेरी तरह वो  ये सोचने में लगे हैं की कुछ नया जुगाड़ करले जल्द से जल्द वर्ना जो आज कुछ लोगो के साथ हुआ है कई और के साथ भी हो सकता है ।  वैसे विभाग या सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता एक को निकल कर अगर आवेदन निकल भी दें तो हजारों फॉर्म अजयंगे । करोड़ो की  कमाई होजयगी , और बेरोजगारी का अकड़ा भी  केंद्र को कम दिखाया जायगा , जिनको पहले मिली थी उनको और जिनको अभी देंगे उनको सबका मिलाकर  दिखाया जायगा ।
 अब सिर्फ एक ही रास्ता है जो हम लोगो के पास  बचा है इतने साल यहाँ पर बर्बाद करने के बाद , की या तो कोई नयी नोकरी ढूंड कर वहा  चले जय सब समय महनत  जो की आज तक को पराया कर के , या फिर से एक मजबूत संघठन  को खड़ा कर के , उनलोगों को दिखाया जाय के हम हार मान ने वालो में से नहीं हैं ।  में दुसरे बिंदु पर ही विशवास करता हु और सब से आग्रह भी करता हु की जब धीरे धीरे कर के जाना सभी को ही (नोकरी छोड़ना )  है , तो क्यों ना एक बार और जंग लड़ी जाय  और इस बार पूरी ताकत से एक मजबूत संघठन को खड़ा करके लड़ा जाये ।

नोकरी मायने नी रखती  , आत्मसम्मान मायने रखता है दो वक्त की रोटी तो एक भिक मांग कर खाने वाला भी कम लेता हैं और हम लोग तो योग्य लोग हैं जो कम से कम अपने हक़ के लिए तो लड़  ही सकते हैं ।

इस कविता से हमे प्रेरणा लेनी चाहिए

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

--हरिवंशराय बच्चन  जी








क्या ये अंत है ?

क्या ये अंत है ?


 हम अगर ये सोच कर  चलें की सब  कुछ अपने हाथो में है और सब वैसे ही होगा जैसे हम चाहें तो ये नामुमकीन है , अपनी पूरी कोशिश झोकने क बाद भी अगर आप उस चीज़ को हासिल न कर पाएं ! तो आखरी में अप किस  को उसका जिमेद्दार ठहरा सकते है.......... खुद को ?????  

नहीं  दरअसल आम जिन्दगी में हम हमारी सारी नाकामी को हम भगवन के भरोसे छोड़ कर आपने मन को समझा लेते है हाँ ये भगवन नहीं चाहता होगा । और आगे बड जातें हैं । क्या उस चीज़ को खोकर और सब इलज़ाम भगवन पर थोप कर हम अपने बचे हुए दिन या कहें जन्दगी निकाल पाएँगे ? क्या हम अपने दिल के  कोने में  छुपा हुआ दर्द जो भगवन भरोसे छोड़ आय है कभी बहार नहीं आयगा ?
वैसे इस समस्या का एक सरकतम उपाय ये हे की आप इतने कठोर बन जायें की कोई भी दर्द आपको छु न सके , पर किसी और की वजह से आप अपने आने वाले कल को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे ! पर कुछ लोग  कर सकते है ऐसा जोकि कठोरे ह्रदय वाले होतें हैं !


to be continued...


प्यार सबके लिए नहीं होता !!!


ये लेख पूरा काल्पनिक है इसका कसी भी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है !

प्यार सबके लिए नहीं होता कुछ लोगो क लिए ये सिर्फ एक समय पारित करने का तरीका है !



निर्द्यिता ही ख़ुशी देती है !
वैसे तो कहने में ये गलत लगता है पर असलियत यही है अगर आप खुशलता से किसी से बात करते हो , प्यार करते हो , कभी किसी का बुरा नहीं करते हमेशा ख़ुशी देते हो लेकिन बदले में ऐसे लोगो को क्या मिलता है "हजारो गम" ! हाँ ये सत्य है अगर आप इस श्रेणी में आते हो तो आप बहुत बड़े मुर्ख हो लगो आपका भरपूर फायदा उठाते है और फिर इतना बुरा आपके साथ करते हैं जो अप सपने भी नहीं सोच सकते , पर यहाँ पर जो लोग निर्दयी होतें है वो लोग हमेशा ही खुश रहतें हैं क्यूंकि वो खुद दूसरा का बुरा कर चुके है तो उन्हें पता होता है की इस से कोई फर्क नहीं पड़ता जिन्दगी चलती रहती है !समय बड़ा ही बलवान होता है बड़ी बड़ी मुश्किलें तक भूल जाता है इन्सान  !
उसने जिन्दगी में सिर्फ एक ही गलती करी की किसी का बुरा नहीं सोचा नहीं बुरा किया , अब जाकर उसे लगा की कितने गमो का पहाड़ घिरा उसपर  !हर चीज़ किसी ने करी है तो सिर्फ छल कपट ही किया है सिर्फ मतलब से किया है ,कुछ सपने दिखाए तो भी मतलब के सिर्फ !पर इन चीजों के लिए किसी को भी गुनेगार नहीं ठहरा सकता क्यूंकि ये उसकी  ही गलती है जो उसने किसी को इतनी तवज्जो दी किसी के  बोले हुए शब्दों को अपना माना उन पर अमल किये ! पर उसे क्या पता था ये सिर्फ एक ढोंग है और सिर्फ जब तक आप उसके जीवन में कुछ मूल्य रखते हो तभी तक वो आपके साथ था जैसे ही अप का कोई मूल्य - काम नहीं रहा आपकी वैल्यू भी वाही ख़तम होगई !वैसे हर कोई येही करता है पर असली गम जब होता है तब कोई दिल से  जुड़ा व्यक्ति ये कर दे ! जिन्दगी में हर सेकंड आपको कुछ सिखाता है , और एक छाप छोड़ जाता है आपके जीवन में और जो दिल से जुड़ा होता है वो इतिहास बनकर रोज पूरी जिन्दगी आपको रुलाता रहता है !काश ये निर्दैयता उस वक्त आजाती जब ये प्यार के झोंके आने लगे थे !
ये प्यरा नहीं व्यापर है ! जहा धन , खूबसूरती ,भविष्य की गुंजाईश ज्यादा मायने रखने लगी हैं ! सुना था प्यरा दिलो के मिलने पर होता है, पर स्थीती  के मिलने को प्यरा नहीं धोका कहेंगे ! कुछ तो कमी रही होगी जो इतना बड़ा फैसला इतनी आसानी से सुना दिया ! दुनिया में हर चीज़ आसान होति है अगर उसे करने की दिल से इच्छा हो और अगर आपका इरादा ही नेक नहीं हो तो फिर लाख कोशिश ही क्यों ना कार्लो अप उसको नहीं पा सकते !
प्यार सबके लिए नहीं हो ता  , अगर आप इसके लायक नहीं हो तो ये भी आपके लायक नहीं है ! इन्सान लायक अपने कर्मो से अपनी भावनाओ से होता है , मतलब से कोई लायक नहीं बनता  !और अगर आप इसके लायक नहीं हो तो अप कभी इसको पा नहीं सकते और पैसे से ख़ुशी खरीदी जाती है प्यरा नहीं ! प्यार सब क लिए नहीं होता भगवन चुनता है लोगो को जो इसके लायक होतें है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सफलता !!!!!!!!! एक चुनोती

सफल  , कहने को तो ये तीन अक्षरों का शब्द है पर ये कहलाना बड़ा ही मुश्किल है . जब हम स्कूल में पड़ते थे उस समय  सोचना अपने आप को बड़ी ही आसानी से डॉक्टर , इंजिनियर ,बिजनेसमैन बंदना बहुत ही आसान हुआ करता था .पर जैसे जैसे हम आगे बड़ते गये दिल दिमाग  का जो ताल मेल है वो बहुत गद्बद्ता गया.  कुछ पल ऐसे थे जब लगा की बहुत कुछ पलिया है और बस अब येही वो हैं  जिसके सहारे जीवन आसानी से निकल जायगा पर वक्त हर वक्त प्रबल नहीं होता .हमारे सितारे ना जाने क्यों डगमगा जाते हैं.  ऐसा किसी एक क साथ नहीं हम सभी क साथ कभी ना कभी  होता ही है .
जैसे जैसे हम इस उलझी हुई दुनिया में उकझ ते जातें है वो बचपना याद आजाता है जहा हम हर चीज़ की ख्वाइश कर सकते थे वहीँ अब हम हर चीज़ दुसरो क मुताबित करतें है उसपर विचार कर कर के इतने निष्कर्ष निकल लेते है और करना तो दूर हम उस बारे में सोचते भी नहीं .
सिर्फ एक धनात्मक  सोच (पॉजिटिव थिंकिंग ) के साथ हम  ये जहान नहीं जित सकते ये , ये सत्य है आपका लोगो क प्रति नजरिया , आपके पास  का माहोल उस पर काफी फर्क डालता है ,लोग आपको हर चीज़ हर सोच बदलने की कोशिश करतें है . आपके हर तर्क को गलत साबित करने में लगे रहते हैं  पता नहीं क्यों कुछ लोगो को इस चीज़ में बड़ी ख़ुशी महसूस होति है .जब आदमी आपके किसी दुःख में आपके साथ नहीं होसकता और  नहीं वो आपके जीवन क लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दे सकता तो उसे हमारे किसी भी प्रगति और सोच को बदलने का कोई हक़ नहीं , और नहीं हमे उस चीज़ को दिल पर लेकर सोचने की कोई कोशिश करनी चाहिए .


जैसे हमारे हाथ की उँगलियाँ  मुक्त होति है कही भी घूम सकती है कुछ भी पा सकती है , पर उसपर ये समाज ये लोग बंदिशों की डोरियाँ लपेटते चलें जाते हैं .कोई चाहता है अप ये ना करें कोई छठा है अप वो ना करें और फिर इस मतभेद में दिल और दिमाग को जो ताल मेल है वो लड़ खड़ा जाता अहि और हम जहा अटके होतें है वाही अटके रह जातें  है . 
जो लोग हमारे लिए प्रेरणा बनते है हमको एक धनात्मक सोच क लिए प्रेरित करतें है ,जिनको पा कर हम भी खुश होतें और खूब सपने सजाते हैं , और एक संतोष रहता है जीवन में , उनसे भी हमरी सोच पे बहुत फर्क पड़ता है वो कसी भी रूप में हो सकते है  आपका प्यार , आपका परिवार . और उस चीज़ का आपके साथ  उतना ही जरुरी है जितना प्रकश का एक पोधे क लिए वो तभी बढेगा जब उसका मन , उसका दिल प्रसन्न रहेगा वो अपने  आप ही हर दिन के जीवन में  आनंद लेने लगेगा .  
अपने अस पास का माहोल अपने हिसाब से बनाना बहुत ही महवपूर्ण है सफल होने के लिए ,जैसे तलब में आप रहोगे वैसा ही पानी आपको मिलगा अच्छा हुआ तो अच्छा , मीठा हुआ तो मीठा , गन्दा हुआ तो गन्दा और उस तलब में कही तक भी चले जाएँ वो वैसा ही रहेगा .
जीवन एक बार बनता है और एक ही मोका मिलता है सब को अपनी लाइफ में या तो उसके लिए मर मिटो  उसे पाने में जी जान लागलो या फिर चुप चाप बेठ कर जैसा समाज , लोग ,परिवार चाहे वो   सहन करते रहो. कुए का मेंडक बनना बहुत आसान है कुंकी वो वाही पैदा होता है और वाही मर जाता है पर समुद्र की जलपरी बनना बहुत मुश्किल . इन मुश्किलों को हटाने का सिर्फ एक ही रास्ता है बस अपने लक्ष्य क पीछे चलो और जो पाने की तमन्ना हो उसे पाने क लिए जी जान लगादो ,लोगो का तो काम है कहना क्कुह अच्छा होगा तो लोगो को नहीं आपको संतोष और आनंद मिलेगा  और कुछ जायगा तो कोई जिन्दगी ख़तम नहीं होजयगी , जितना आपकी काबिलियत है उतना तो आप कभी भी बना सकते हो उससे ज्यदा तो आपके लिए एक धनात्मक उपलब्धि है जीवन की !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!               













  

क्या पैसा ही सब कुछ होता है !!!!!!!!!!

क्या पैसा ही सब कुच्छ होता है ,अगर ये सवाल आप किसी भी आम आदमी से पूछोगे तो उसका जवाब हमेशा ही रहेगा हाँ पैसा ही सब कुछ होता है !पैसे से आप दुनिया की हर ख़ुशी , हर चीज़ हर वो मुकाम ला सकते हो जिस से की आप को ख़ुशी मिले आप जीवन में आनंद पा सकें ! जब कोई लड़की किसी से प्यार करती है , या फिर कोई लड़की की किसी लड़के से शादी होने वाली होति है तो क्या वो सोचती है की उसका पति उसे वो सब ख़ुशी दे पायगा क्या वो हर चीज़ जो हम telivision/ या हमारे आस पास आमिर लोगो को करता देखते है क्या वो सब में कर पाऊँगी , क्या मेरा बच्चा जिसकी अभी हाथ की लकीरे भी नहीं बनी है वो सरे सुख और ख़ुशी पा सकेगा जो हम दुसरे लोगो को देखकर अपने मन में सोचते है !


में ये नहीं कहता की पैसा ही सब कुछ नहीं होता ! पर पैसे की जीवन में एक ऐसी जगह बनी हुई है की उसके बिना हम अपनों के और पास आ सकते हैं ! हर व्यक्ति चाहता है और इस बात की पूरी कोशिश करता है की वो अपने परिवार की हर इच्छा को पूरी कर सके , वो हर चीज़ दे सके जिसके लिये उसका बच्चा रोता हो , हर वो चीज़ जिसके लिए उसकी पत्नी इच्छा करती हो ! हर वो चीज़ जिन के लिए उसके माँ बाप ने उसकी ख़ुशी में नयोछाव्वर कर दी हो !पर हर व्यक्ति इस में सक्षम नहीं होता पर वो अपनी पूरी जान लगा देता है उनसभी को पाने में !
जिया पैसो से हम अपने एक पल की ख़ुशी पातें है उसमे पता नहीं कितने गरीबों का एक वक्त का खाना मिल जाये , पर हमको किसकी परवाह है हम अपने जीवन को संतुष्ट करने में लगें है हम मिलो घूम आते है ख़ुशी के लिए , लाखो रुपये उड़ा देतें है फिर भी हमे वो ख़ुशी नहीं मिलती जो एक गरीब को खाने खिलने पर किसी सज्जन को मिलती है , और ऐसा नहीं होता की उस व्यक्ति क पास पैसा बहुत है की वो इधर उधर लोगो की सेवा में उड़ा  रहा है पर ऐसा नहीं है , उस सज्जन ने अपने जीवन में ये दिन जरुर देखें होंगे जब वो गरीब और असहाय होगा की भूख का दर्द क्या होता है !


जो आदमी जमीं से उठता है उसे उसकी कद्र हमेशा याद रहती है की कितना दर्द होता है जमीं में !

में बस इतना चाहता हूँ की  में इतना पैसे कमा सकूँ की अपनों की वो हर इच्छा पूरी कर सकू और कभी मोका लगे तो किसी गरीब की एक वक्त की खाने की भूक मिटा सकूँ ! 

मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!





मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते , सच में मुझे मेरे सपने सोने नहीं देते  आज भी ये सवाल मुझे बार बार याद अत है ,  living my dreams or still i m dreaming .
किसी ने कहा है की सुबह क सपने सच होते हैं ,पर मुझे तो सुबह सबसे अच्छी नींद अति है ,पर आज मेने सोच ही लिए की रात भर जगता रहूँगा और सपने देखने की कोशिश सुबह करूँगा काश ये तरीका काम आजाये ! दिन रात यही सोचता हु कैसे करूँ , कैसे निकलू सब छोड़ क कही दूर खली मैदानों में चला जाऊ और बस सेलफिश बन जाऊ सिर्फ अपने बारे में सोचु ,क मुझे क्या चाहिए फिर अंत में  दिल नहीं मानता साला और यही रुक जाता हूँ !


रोज सुबह यह सोच कर उठता हूँ की आज तो बस ,पर बस में दौड़ते दौड़ते दिन कहा चला जाता है , मालूम ही नहीं पड़ता ! और रात भर ये सोच सोच कर नींद खुल जाती है की आज का दिन तो गया कल तो सुबह से पक्का.पर ये पक्का आज तक पक्का नहीं हो पा रहा !


Life seams to be a packets of pipelines (weeks) once you enter you will come out at the end and then the same routine you follow till you survive.
और यह हमेशा चलता रहता है और जब हम अपने अप से पूछने लायक स्थति में आते है की हमने इस जीवन से क्या पाया है तो हमारे कहने क लिए कुछ  नहीं होता , इस चीज़ में तो जानवर अच्छे होते है क उनके पास दिमाग ही नहीं होता जिससे की वो अपने अप से पूछ सके की क्या किया इस जीवन में वो बस जी लेते है .

पता नहीं में इतना क्यों डर जाता हूँ , खुद को अकेला समझता हु कभी के में अकेला अपने आप से कैसे जीतूँगा कैसे में सब कर सकूँगा ,फिर में उसको लिखलेता हूँ.
पता नहीं क्यों पर जब इन शब्दों को में फिर से पड़ता हूँ तो अताविश्वास अता है की हाँ में कुछ करने की कोशिश में लगा हूँ और करता रहूँगा जब तक में कुछ पा ना लूँ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!









चलती का नाम जिन्दगी !!!!!!!!!!!!!!!!!!! :-(



जीवन जीना सिखा देता है 

सच ही कहा है की जीवन जीना सिखा देता है ,मेने इतना जीवन देखा नहीं है फिर भी जितना सा भी उसमे ये बात मुझे सच ही लगी .अपने जीवन में इतना व्यस्त हो ता जारहा हूँ की मुझे मेरे सपने के लिए समय कम लगने लगा है , रोज्मार्र्हा की जिंदगी इतनी सरल लगती है और आसानी से कट जाती है पर रत को नजाने क्यों एक सवाल मन में अत है क्या आज मेने अपने लिए कुछ किया , कुछ सोचा दिन भर दुसरो क सपनो के लिए जीते हुए ख़तम होगये . 
और ये दिल हमेशा बेचैन होता रहता है और रात भर सोने नहीं देता की जिन्दगी फिर नहीं मिलेगी बीटा कुछ तो करना है कुछ तो पाना है और इसी सोच में रात कत्जती है और अगला दिन फिर वाही भाग दौड़ में निकल जाता है इस बीमारी का इलाज तो मुझे भी नज़र नहीं  आरहा  की  कैसे में क्या करू जो सब कुछ छोड़ कर बस वाही करने लागु जो मेरा दिल कहता है , वाही करू जिसके सपने में हमेशा देखता हूँ .क्या इतना आसान है .
नहीं समझ सकता , नहीं कर सकता क्युकी ये डर फिर से दिल में बस जाता है की कभी जो मेने सोचा वो मुझे कहा लेजयेगा ,लोग क्या कहेंगे का अच्छा भला जी रहता पता नहीं कैसे कैसे सवाल मन में आने लगते है की जिनके जवाब मेरे खुद क पास भी नहीं होते .
अकेला महसूस होता है , अकेला खड़ा हूँ  अकेला लड़ना है , सभी को आशाएं है पर किसी को मन की भावनाओ से कोई वास्ता नहीं .कुछ करने का जुनून भी सोगया है उसे भी मुझ पर विश्वास नहीं रहा की जब में अपने आप के लिए हिम्मत नहीं करसकता तो वो भी मेरे अंदर रहकर क्या करेगा .कठिन राहों पर कोई साथ नहीं देता और देगा भी क्यों उसके खुद क सपने भी तो उसे ये कदम उठाने नहीं देते .और फिर येही सोच कर अपने आप को मानना पड़ता है कल से जरुर , कल से जरुर ..........................

पर वो कल कब आयेगा ??????????????????

Live your dreams!!!! लिव योर लाइफ !!!!



हर कोई कहता है समझाता है अपने दिल की सुनो !!!!! पर क्या दिल की सुन कर करना इतना आसान होता है मुझे तो नहीं लगा.
अगर में अपने दिल की सुनता हु और हर वो चीज़ करने की कोशिश करता हु जो में करना चाहता हूँ तो क्या में रिश्ते , व्यहवार और जो ये जिन्दगी अभी में जिरह हूँ उसे निभा पाउँगा , जब जब मेने ये सोचा के आज के आज वो दिन है इस दिन से में अपने दिल की सुनूंगा तो पता नहीं क्या के दिक्कते मुझे आने लगी मुझे लगा और लगता ही रहता है की में इस जीवन के जाल में उलझता जारहा हूँ A और जितना में इससे बहार निकलने की कोशिश करता हूँ पता नहीं और अंदर चला जाता हूँ A कहीं न कहीं ये रिश्ते , व्यहवार ऐसी तकलीफे उत्पन्न करता है की में उन्हें तव्ज्जो देने में अपने सपनो को वाही ख़तम करदेता हूँ A
और समय के काँटे मुझे हर रोज ये सोचने पे मजबूर करदेते हैं की क्या , कब , कैसे में अपने समय को अपने सपने पुरे करने में लगाऊंगा A हर दिन में  मेरी संभाविक दिनचर्या में और हर रात अपने सपने की आहुति के आंसू में निकालता A
हर वक्त बस मुझे एक ही चीज़ महसूस होति है की हर चीज़ मेरे लिए पहले से ही बनी हुई है , बस मुझे करते रहने है A कभी किसी ने नहीं पूचा में क्या चाहता हु A और बस ये समय उही चले जारहा है A  कोई कहता है ये तो में कह ता हूँ हाँ , कोई कहता है वो तो में कहता हूँ हाँ और इसमें मेरे जीवन के अनमोल पलों को में ख़त्म करता रहा हूँ और क्या पता करता रहूँगा A और वो हिम्मत जो मुझमे नहीं है की में सब कुछ छोड़ कर बस वाही सोचु के में क्या करना चाहता हूँ कैसे करना चाहता हूँ A

फ्लोविंग विथ द फ्लो ऑफ़ रिवर !!! जहाँ मुहे ये जमाना लेजरह है वहीँ में चला जारहा हूँ बस .

2014 में अरहा हूँ

एक साल 2013 और ख़तम पता नहीं मुझे खुश होना चाहिए या दुखी !!!!!!!!!!!!

दुखी इसलिए की मेरा एक साल खत्म हो रहा है और ख़ुशी इस बात की के में अगले साल में जरहा हूँ .इस साल बहुत से उतर चड़ाव करे , ये बात तो अब महसूस हुई जब हम असलियत में पड़ लिख कर बाहरी दुनिया में जातें है तो ,दोस्त ,परिवार ,स्वस्थ्य सब को एक साथ संभालना मुश्किल होजाता है पर , दोस्तों बिखर जातें हैं , घर पर कम वक्त दे पाते , पर इनसब से दूर जब भी किसी दोस्त का कॉल , कभी अचानक से उससे मिलना , घर पर एक साथ मिलकर बातिएँ करना बहुत अच्छा लगता है !
एक दुसरो पर जान छिडके ने वाले दोस्त कम ही मिलतें है.......
इस पुरे साल हम सभी ने कई उतर चड़ाव का सामना किया पर आखिर सभी अपनी जगह पर खुश है कुछ अभी भी अपनी मंजिलो को पाने में लगे हुए है ,अपने सपने पुरे करने के लिए जी जन लड़राहे है ऊन सब को मेरी और से बधाईयाँ और मेरे सभी दोस्तों , गुरुजनों ,शुभचिंतक को मेरी और से नव वर्ष की शुभ कामनाएं !!!!!!!!!!!!!!
सभी के सारे सपने पुरें हों , काफी कुछ हासिल करना है इस जीवन में !!!!!!!!!!
में तो येही कहना चाहूँगा -

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
.
.
.
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Happy New Year !!!!!!!!!!!
Stay connected and tuned
2014

विशाल 

जीना इसी का नाम है ???

जीना इसी का नाम है ??????????????????????
क्या जीना इसी का नाम है , बिना किसी की परवाह किये जीने क्या इसी का नाम जीना है  ?जब भी हर कुछ अच्छा नज़र आता दीखता है , सब कुछ खुशहाल नज़र अता दीखता है तो फिर ये बिच में कैसी उलझाने आजाति है , बिच में कभी गम कभी समझोते आजाते है  I पुराने युग में जब लोग को ना पैसा , ना दोस्त , ना लोग , नहीं  परिवार दीखता था वो तो बस जीना जानते थे , पर आज हम इसको छोड़ कर सभी चीजों की परवाह करते है , वैसे तो हर चीज़ अपनी जगह पर सही होति है , और कीसी को किसी भी व्यक्ति के जीवन में अर्चाने डालने का कोई अधिकार नहीं होता , हर कोई मुक्त है जो वो चाहे वो करने के  लिए ऐसा सोच कर में जीता हूँ I पर क्या जिस व्यक्ति क लिए हमने ये सोचा की  उसका जीवन किसी और की वजह से प्रभावित नहीं होता , तो क्या ऐसा असलियत में होता है I क्या पता हर व्यक्ति कैसे क्या सोचकर जीता है I
एक छोटी सी जिन्दगी मिली है  , उस में भी हम वो क्या कहेगा , वो क्या सोचेगा , ऐसा नहीं होसकता , वैसा नहीं होसकता में अपन अध जीवन निकल देते है और जब हिम्मत अति है कुछ कर्गुजरने की जब तक सब कुछ हाथ से निकल जाता है I और कहने को सिर्फ बचा हुआ जीवन रह जाता है जिसे मन मारकर बिताने के आलावा कोई रास्ता नहीं नज़र आता है I  और क्या वो लोग खुश रेह्पाते है अपने  जीवन में I
क्या जीना इसी का नाम है ???????????????



जीवन  काटना , या जीवन जीना सुनने में और समझने में बहुत ही  अच्छे और काफी अलग प्रतीत होते हैं , पर क्या हम इन शब्दों को समझ ते है और कभी भ इनके सोचेते हुए जीवन व्यापन करतें है I मेरे अनुचाव से तो मेनेबहुत ही कम ऐसा देखा है की लोग अपने सपनो को पाने के लिए अपना पूरा जीवन लगादेते हैं पर ,और कुछ जीवन काटने पर भरोसा रखतें है के चलो आज भी गया , कल भी चल जायेगा और एक दिन हम भी चले जायंगे वैसे कुछ ऐसा करना की हम कभी ना  भुला पायें ऐसा बहुत ही कम देखने को अत है I
जो भी ख़ुशी पाने के लिए करें और खुश रहें वो ही सही है I
में खुद भी येही सोचता हूँ , और इस वाख्या पर मुझे एक गाना हमेशा याद अत है “हँसते हँसते कट जाये रस्ते , और जिंदगी ऊँही चलती रहे”  I हर पल में जीने का मज़ा ही कुछ और ही है I हर खुनशी को बांटना , उसे पाने में पूरी जान लगा देना इसेही जिन्दगी कहतें है शायद , पता नहीं पर खुद की हर एक कमियाबी के बाद कुछ ऐसा महसूस होता है जो बतया नहीं जा सकता और  ये पल जब भी अत है तो  समय ऐसा चलता है की पता ही नहीं लग पता है की आप ने अपने जीवन के ये पल कितने अच्छे निकाले हैं I और ये इतना असं नहीं होता हर चीज़ समय मांगती है हर ख़ुशी विलंभ मांगती है I  
में तो इसी को कहता हु के हाँ जीना इसी की नाम है I I I I I I I



दोस्तों के साथ एक रोमांचक सफ़र ! अकाल्पनिक

रोमांचक सफ़र


रोमांचक सफ़र

हम लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस सफ़र पर हम निकल रहे हैं, वह हमारी ज़िंदगी के यादगार सफ़रों में से एक बन जाएगा—ऐसा सफ़र जिसे हम कभी भूल नहीं पाएँगे।

आइए, पहले उन लोगों से आपको मिलवाता हूँ, जिनकी वजह से यह यात्रा और भी ज़्यादा रोमांचक बन गई।

नईमुद्दीन सर

हमारे फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉन। शाहरुख़ ख़ान के जबरदस्त फैन। पहले इप्का के लिए मार्केटिंग करते थे और अब मास्टर ऑफ़ फार्मेसी कर रहे हैं, लेकिन मार्केटिंग का भूत आज भी कभी-कभी उन पर सवार हो ही जाता है।
इनकी सबसे खास बात यह है कि जब तक ये चुप रहते हैं, दुनिया बहुत शांत लगती है; लेकिन जैसे ही बोलना शुरू करते हैं, फिर किसी के पापा भी इन्हें रोक नहीं सकते। और हाँ, ये जयपुर से हैं।

देवेंद्र

दूसरे नंबर पर आते हैं देवेंद्र। बाहर से शांत और सीधे-सादे लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इतनी बड़ी-बड़ी बातें कर देते हैं कि सामने वाला सोच में पड़ जाए। ये ग्वालियर के रहने वाले हैं।

संदीप

तीसरे नंबर पर हैं संदीप—अफजलपुर, ज़िला मंदसौर से। काफ़ी समझदार हैं, लेकिन एक जगह आकर हर लड़के की तरह इनकी भी समझदारी थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है। जी हाँ, लड़कियाँ ही इनकी कमजोरी हैं। इसके अलावा इन्हें पूरी तरह समझदार कहा जा सकता है।

इमरान खान

चौथे नंबर पर हमारे इमरान साहब—ग्वालियर से। नवाबी शौक़ रखते हैं और आमतौर पर बड़ी समझदारी से पेश आते हैं। लेकिन जैसे ही किसी समझदार इंसान से बातचीत होती है, न जाने क्या हो जाता है—उलटी-सीधी बातें निकलने लगती हैं।

नंबर पाँच (सौरभ)

अब आते हैं हमारे नंबर पाँच पर—जो हर जगह अपनी पाँचों उँगलियाँ घी में चाहते हैं, चाहे मामला उनके कान का हो या किसी और का।
इनकी सबसे बड़ी बीमारी है डाउट—और वो भी पढ़ाई वाले नहीं, हर तरह के। हर चीज़ इन्हें दूसरों से ज़्यादा चाहिए। स्वभाव से बेहद भले हैं, कोई भी इन्हें आसानी से उल्लू बना सकता है। साथ ही ये बहुत सहायक भी हैं—हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार।

और अब अपने बारे में क्या कहें—हम तो जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे।


सफ़र की शुरुआत

हमारा सफ़र शुरू हुआ 18 दिसंबर 2012, सुबह 3 बजे। ट्रेन हमें मंदसौर स्टेशन से पकड़नी थी। सभी लोग समय पर पहुँच गए। वहाँ से हमें रतलाम जाना था।

ट्रेन में बैठते ही गप्पें शुरू हो गईं। न इधर देखा, न उधर। सुबह-सुबह यात्रियों की गालियाँ भी सुन लीं—
“सोने दो सालों, कहाँ-कहाँ से आ जाते हो!”
गुस्सा तो ऐसा आया कि पूछिए मत।

किसी तरह रतलाम पहुँचे। सुबह 5:30 बजे सीधे बजरंग वाले की दुकान पर चाय पी। अगली ट्रेन 7 बजे थी, तो वेटिंग रूम में जाकर टाइम पास किया और फिर ट्रेन पकड़ ली—जो हमें सीधे अंबाला कैंट ले जाने वाली थी।

ट्रेन में हमारी सीटों का जुगाड़ बड़ा दिलचस्प था—दो सीटें दूर थीं और चार एक साथ। इमरान, संदीप और मैं साथ बैठना चाहते थे, तो सौरभ और नईमुद्दीन को “सोने का बहाना” बनाकर दूर भेज दिया।

धीरे-धीरे आसपास के यात्रियों से जान-पहचान बढ़ी। रात को घर से लाया खाना खाया—हम दोनों ने जरूरत से ज़्यादा खाना पैक कर रखा था।

ठंड बढ़ने लगी थी, थकान भी थी, लेकिन दोस्तों के साथ होने से कुछ पता ही नहीं चला। सुबह 4 बजे ट्रेन हमें अंबाला कैंट पहुँचा गई।


अंबाला से चंडीगढ़

सुबह के चार बजे, कड़ाके की ठंड। मालवा क्षेत्र से आए हम लोगों के लिए ये बिल्कुल नया अनुभव था। आराम की कोई जगह नहीं मिली, तो वेटिंग हॉल में ज़मीन पर चादर बिछाकर सो गए। न शर्म थी, न झिझक—बस नींद थी।

करीब 9 बजे होटल ताज पहुँचना था। स्टेशन पर तैयार होकर बाहर निकले। फोटो सेशन शुरू हुआ—“मेरा फोटो खींच, मेरा खींच।”
नाश्ता करके बस में बैठे और एक घंटे में चंडीगढ़ पहुँच गए।

GPS की मदद से होटल ताज पहुँचे। कॉलेज की ब्लेज़र में ताज होटल में एंट्री—अलग ही एहसास था। अंदर पहुँचते ही एक मैडम आईं और बोलीं,
“आपका स्टॉल नंबर 3 है, जाकर सेटअप कर लीजिए। गवर्नर आने वाले हैं।”

हमारा पहला अनुभव था, और हम कुछ भी नहीं लाए थे—सिर्फ़ हम और हमारी ब्लेज़र। डर तो लगा, लेकिन जैसे-तैसे काम चलाया।

सेमिनार शानदार था—बड़े-बड़े साइंटिस्ट और रिसर्चर। हमारे लिए ये सब बहुत बड़ा अनुभव था।


चंडीगढ़, अमृतसर और देशभक्ति

चंडीगढ़ में हमने रोज़ गार्डन, रॉक गार्डन और सुखना लेक देखी। सामान ज़्यादा था, तो सौरभ को फिर से “जिम्मेदारी” दे दी।


थोड़ी देर बाद खबर आई—पुलिस ने सौरभ को रोक लिया!
ज़्यादा कुछ नहीं था, बस शक हुआ था। सब ठीक रहा।

वहाँ से अमृतसर के लिए ट्रेन पकड़ी। ठंड ने हालत खराब कर दी। सुबह करीब 3 बजे अमृतसर पहुँचे। गोल्डन टेंपल के लिए मुफ्त वाहन मिला और सुबह 4 बजे मंदिर पहुँच गए।


वहाँ की व्यवस्थाएँ—नहाने, रहने, खाने की—अद्भुत थीं। जितना सुना था, उससे कहीं ज़्यादा अनुभव मिला।
अंदर का माहौल—शांत, सुकून भरा, आध्यात्मिक।

इसके बाद वाघा बॉर्डर गए। वहाँ असली देशभक्ति का अनुभव हुआ—शब्दों में बयान करना मुश्किल है।


To be continued…







ALONE

"Survival of the fittest" डार्विन की यह बात अज मुझे सच लगी .हर व्यक्ति दुसरे से आगे निकलना चाहता है और अगर वो नहीं निकल पता है तो वो उसे हटाने की कोशिश करता है।और जो व्यक्ति उनसे बाख जाता है वो आगे होता है।वैसे हम लोगो को क्या समझे क्या वो हमसे मीठी बाते करते है हमारे हित में बाते करते है तो क्या वो हमारे लिए अच्छा सोच रहे है . क्या पता किस पर भरोसा करें या किस पर भरोसा न करें .
हर व्यक्ति भरोसा दिलाता है के यह सही है यह करले वो सही है वो करले पर किस पर भरोसा करें ये कोई नहीं बताता है .
लोग अपना मतलब जुटाने में ऐसे लगे है की उन्हें सामने वाले के बारे में कुछ दिखाई नहीं देता वो तो बस एक रास्ता हे उनका मतलब पूरा करने का ,पर आज मुझे एहसास हुआ की क्या पता में गलत हु या में इस चलते रहने वाली दुनिया में अपने आपको सही जगह नहीं दिलापरः हु ,हर चीज़ एसी होगी है जैसे काटने को दोड़ रही है . अगर अप सच्चे हो और हर व्यक्ति पर भरोसा कर लेते हो तो इसमें आप की कोई गलती नहीं है और आप दुनिया की नजरो में बहुत अछे हो पर क्या आप अन्दर से खुश नहीं रह पते क्योकि जब आपको पता लगता है आप तो बस एक कटपुतली बन गे हो लोग आपका इस्तमाल करके आगे बढ रहे है और आप वाही हो जहा आप हमेशा थे .पर इस समस्या का हल कैसे निकले कैसे आप लोगो से बचे क्या करें मुझे इसका एक ही रास्ता समझ अत हे .
आप पत्थर बन जाय , कुछ लोग होते है न जू सबकी हाँ में हाँ करते है सब जुल्म सहते है वैसा कुछ ,वाही एक रास्ता मुझे नज़र आता हे ,जिस से आप भी खुश रह सकते है और हर व्यक्ति जो आपके साथ है वो भी खुश रह सकता है .

आप कितनी भी कठिनाई में हो आप ही को उससे बहार आना होगा क्योकि हम अकेले आय है और अकेले ही जाना हे , समय और दुनिया किसी क लिए नहीं रूकती वो चलती रहती है या तो आप हार कर बैठे रहो या सब कुछ भूल कर नै तरीके से जीना चालू करदो .पहले खाना खाने क लिए लोग एक दुसरे की जान लेलेते थे , पर आज आगे निकलने के लिए उसे इतना demotivate कर देते की वह व्यक्ति न कुछ सोच पता है और जो कर पाने की शमता उसमे रहती है वो भी ख़तम हो जाती है।
न जाने इस कठिनाई से उभरने में मुझे कितने दिन लगेंगे कितनी रातों की नींद मुझे छोडनी पड़ेगी नहीं पता पर इस चीज़ से में उभरूंगा और इन लोगो को यह साबित करूँगा की  व्यक्ति काबिल हो तो उसे कोई नहीं रोक सकता ,यह साबित करूँगा की हर व्यक्ति की कुछ अहमियत होती है और वो उसे मनवाने में अपना पूरा जीवन लगा सकता है ......................................“I like living. I have sometimes been wildly, despairingly, acutely miserable, racked with sorrow, but through it all I still know quite certainly that just to be alive is a grand thing.”

मेरे दिमाग में भूसा नहीं भरा हे। :-(
Loyal

Aaj i.e  in 21 century , is anybody is loyal and honest .

Duniya chal rahi hai chalti rahegi and peoples here are just moving like water flowing in a stream of river ,they doesn't bother about stones ,way and many other problems as in real life they might , to be honest ,must be loyal bus harkoi apna matlab ka bhukha hai , if he needs something then he will be yours and as work over the term is over and u can find it in many circumstances.

If you are honest then just leave this quality to survive in this world as loyalty and honesty doesn't make u great it will ruins u.The people will crunch u as they know there target not yours. There are very less peoples in this world who just think how the next person was thinking . They don't bother what u thinks they just do what they want , according to me this quality was good that doing what ur heart likes but only when u are doing gud for the peoples, but if you don't think gud for others then u are not honest to him and it will ultimately give trouble to that person.

Think great can really help you to overcome this , many peoples are there who are just living for others what he/she is doing, what he/she is getting but when we ignore all this and just think about us ( little selfish) on this places then we can overcome so many problems in our life .Why should we waste our precious time in thinking about others ,life is very small .

Honesty is the best policy , but it changes with our wills if we have any sort of work then we can easily cheat anybody and we will be not apologize for that , because we have our work.

Whats life..........????

What people thinks .....about life or is people thinks about the life?????.My answer is no.
We all are moving like water , we will move where we get the way in a calm. We even don't try to make our own ,nothing in the world for which we can say proudly that is MINE . If we ask any person what you have own then he/she will say This children are mine , This house is mine , This car is mine etc.Nobody of us giving a single thing to world , that we can called as our own and is still used by everyone in the world , this might be any idea , taught or thing.

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